शिवानी यादव। भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव हुआ है। विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. अविनाश बाजपेयी को उनके पद से हटा दिया गया है। अब उनकी जगह डॉ. पी. शशिकला को कुलसचिव का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
यह फैसला NSUI (राष्ट्रीय छात्र संघ) द्वारा लंबे समय से किए जा रहे विरोध और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह द्वारा कुलपति को लिखे गए पत्र के बाद लिया गया है। NSUI और कई छात्रों का आरोप था कि डॉ. बाजपेयी की नियुक्ति नियमों के खिलाफ हुई थी और उन पर कई प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप थे।
डॉ. पी. शशिकला को मिला नया प्रभार
MCU प्रशासन ने 11 जुलाई 2025 को एक आधिकारिक आदेश जारी किया, जिसमें बताया गया कि कुलसचिव डॉ. अविनाश बाजपेयी को पद से हटाया जा रहा है। उनकी जगह विश्वविद्यालय की वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. पी. शशिकला को कुलसचिव का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है। वहीं, डॉ. बाजपेयी को छात्र कल्याण विभाग का नया प्रभारी बनाया गया है। यह फैसला अचानक नहीं हुआ है, बल्कि इसके पीछे पिछले कई महीनों से चल रहा विरोध और शिकायतें शामिल हैं।

NSUI ने क्यों किया विरोध?
NSUI के तनय शर्मा ने पहले दिन से ही डॉ. बाजपेयी की नियुक्ति का विरोध किया था। उनका कहना था कि यह नियुक्ति नियमों के विरुद्ध है और विश्वविद्यालय प्रशासन ने सही प्रक्रिया का पालन नहीं किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि डॉ. बाजपेयी के कार्यकाल में कई प्रशासनिक फैसले छात्रों के हित में नहीं थे और विश्वविद्यालय में जवाबदेही नहीं थी। NSUI ने इस मुद्दे को कई बार विश्वविद्यालय और राज्य सरकार के सामने उठाया। उन्होंने ज्ञापन सौंपे, प्रेस कॉन्फ्रेंस की और सोशल मीडिया पर भी अभियान चलाया।
दिग्विजय सिंह ने जन्मतिथि को लेकर उठाए सवाल
पूरा मामला तब गंभीर हो गया जब राज्यसभा सांसद और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने 4 जून 2025 को विश्वविद्यालय के कुलपति को एक पत्र लिखा। उन्होंने डॉ. बाजपेयी की उम्र और उनके बेटे की जन्मतिथि को लेकर सवाल उठाए।

दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि डॉ. बाजपेयी द्वारा विश्वविद्यालय को दिए गए कागजात में उनके बेटे का जन्म साल 2001 में बताया गया है। जबकि राज्य सरकार के 2000 में जारी नियम के अनुसार, ऐसे किसी व्यक्ति को कुलसचिव नहीं बनाया जा सकता जिसकी संतान 26 जनवरी 2001 से पहले जन्मी हो।
यह नियम सरकारी सेवाओं में सपष्टता और उम्र सीमा को लेकर बनाया गया था, ताकि कोई भी अधिकारी नियमों से बाहर जाकर नियुक्त न हो सके।
NSUI ने फैसले का किया स्वागत
डॉ. बाजपेयी को हटाए जाने के फैसले के बाद NSUI ने इसे एक ऐतिहासिक फैसला बताया। संगठन ने कहा कि यह छात्रों की आवाज की जीत है और अब विश्वविद्यालय में पारदर्शिता की उम्मीद की जा सकती है।संगठन ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को भी धन्यवाद दिया और कहा कि उनके हस्तक्षेप के बिना यह फैसला नहीं हो पाता।
अब आगे क्या?
अब छात्रों और शिक्षकों को उम्मीद है कि MCU में जल्द ही स्थायी कुलसचिव की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू होगी। इसके साथ ही विश्वविद्यालय में बाकी प्रशासनिक पदों की भी जांच पड़ताल हो सकती है। यह भी मुमकिन है कि भविष्य में किसी भी नियुक्ति से पहले खुली प्रक्रिया अपनाई जाएगी और छात्रों की राय को भी महत्व मिलेगा।
छात्र राजनीति को नई दिशा
यह घटनाक्रम यह भी दिखाता है कि छात्र संगठनों की भूमिका सिर्फ चुनाव तक सीमित नहीं है। अगर छात्र संगठनों की आवाज मजबूत हो, तो वे विश्वविद्यालय के बड़े फैसलों को भी प्रभावित कर सकते हैं। NSUI की लगातार मेहनत और संगठन की एकजुटता ने यह साबित कर दिया कि छात्रहित में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। यह घटना बाकी विश्वविद्यालयों के लिए भी एक उदाहरण बन सकती है कि प्रशासनिक जवाबदेही और नियमों का पालन कितना जरूरी है

