रोहित रजक, भोपाल: मध्यप्रदेश में बहने वाली पवित्र नर्मदा नदी को अब पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त बनाया जाएगा। इस उद्देश्य से सरकार ने “निर्मल नर्मदा योजना” की शुरुआत की है, जिसके तहत 1077 किलोमीटर में बहने वाली नर्मदा नदी को स्वच्छ और निर्मल बनाने के लिए कुल 2549 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

यह योजना शहरी विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की समीक्षा बैठक के दौरान घोषित की गई। उन्होंने बताया कि इस योजना के अंतर्गत नर्मदा नदी के किनारे बसे 54 शहरों और 818 गांवों से बहने वाले गंदे व अपशिष्ट जल को शुद्ध किया जाएगा। इसके लिए हर क्षेत्र में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) बनाए जाएंगे ताकि बिना साफ किए कोई भी गंदा पानी नर्मदा में न जाए।

परिक्रमा पथ का भी होगा सर्वे

इस योजना के तहत नर्मदा के किनारे बनने वाले धार्मिक व परिक्रमा पथ का भी सर्वे कराया जाएगा। विजयवर्गीय ने कहा कि नर्मदा के पास के धार्मिक स्थलों को सुंदर और सुव्यवस्थित रूप में विकसित किया जाएगा। साथ ही इन स्थानों पर ठहरने, शौचालय, पीने का पानी और अन्य मूलभूत सुविधाएं भी बढ़ाई जाएंगी ताकि तीर्थयात्रियों को कोई परेशानी न हो।

2025 तक पूरा होगा कार्य

बैठक में जानकारी दी गई कि यह योजना वर्ष 2025 तक पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए नगर विकास आयुक्त आयुष्मान सिंह ने संबंधित अधिकारियों और नगर निगमों को निर्देश दिए हैं कि वे योजना के लिए जिम्मेदार कंपनियों को तय करें और समय सीमा में काम शुरू किया जाए।

आवास नीति में होगा बदलाव

विजयवर्गीय ने यह भी कहा कि प्रदेश में आवास नीति को नर्मदा निर्मल योजना के हिसाब से जोड़ा जाएगा। नए मकानों और कॉलोनियों को मंजूरी तभी मिलेगी जब वह अपने गंदे पानी के निपटान की समुचित व्यवस्था दिखाएंगे। इससे नर्मदा में सीधे गंदा पानी गिरने की घटनाओं पर रोक लगेगी।

क्यों जरूरी है निर्मल नर्मदा योजना?

नर्मदा नदी को मध्यप्रदेश की जीवनरेखा माना जाता है। यह नदी लाखों लोगों के पीने के पानी, खेती और धार्मिक आस्थाओं का आधार है। लेकिन पिछले कई वर्षों से इसमें लगातार प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। शहरों और गांवों का सीवेज बिना साफ किए नदी में गिर रहा है। इससे न सिर्फ जल जीवन प्रभावित हो रहा है बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था भी आहत हो रही है। इस समस्या से निपटने के लिए सरकार ने यह बड़ी योजना बनाई है, जो न केवल नदी की सफाई करेगी बल्कि किनारे बसे इलाकों में स्वच्छता, धार्मिक पर्यटन और आर्थिक विकास को भी बढ़ावा देगी।

स्थानीय रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

इस योजना से स्थानीय स्तर पर भी रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। सफाई, प्लांट निर्माण, रखरखाव और पर्यटन से जुड़े कार्यों में बड़ी संख्या में युवाओं को काम मिलेगा। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य और स्वच्छता से संबंधित सेवाओं में भी सुधार आएगा। “निर्मल नर्मदा योजना” न केवल एक सफाई अभियान है, बल्कि यह मध्यप्रदेश की संस्कृति, पर्यावरण और आम जनता के स्वास्थ्य की दिशा में एक बड़ा कदम है। यदि यह योजना समय पर और ईमानदारी से लागू होती है, तो नर्मदा नदी को फिर से जीवनदायिनी और निर्मल बनाने का सपना जरूर साकार होगा।

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