रिपोर्ट, काजल जाटव: भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन और अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला और Axiom मिशन 4 (Ax-4) की इंटरनेशनल टीम का ISS (International Space Station) पर मिशन अब आखिरी दौर में है। उनकी वापसी आज 14 जुलाई 2025 को हो सकती है लेकिन उससे पहले आज 13 जुलाई शाम 7:25 बजे IST पर NASA और Axiom Space लाइव विदाई प्रोग्राम का आयोजन करेंगे।

अनडॉकिंग और वापसी की प्रक्रिया

आज शाम 7 बजकर 25 मिनट (IST) पर, NASA के साथ मिलकर शु्भांशु और उनकी टीम की विदाई समारोह में वीडियो के ज़रिये बात होगी, जो Expedition 73 Crew के साथ जुड़ा होगा। यह कार्यक्रम ISS पर लाइव हो रहा है, और यह उनके लिए काफी भावुक और खास पल होगा क्योंकि इसके बाद उनकी अनडॉकिंग यानि उन यानों को एक दुसरे से अलग की जाने की प्रक्रिया शुरु की जाएगी। 

इस बीच, टीम 14 जुलाई को दोपहर करीब 4: 30 से 4 : 35 तक अंतरिक्ष स्टेशन से पृथ्वी की तरफ रवाना हो जाएगी। और लगभग दो दिन बाद, यानी १५ जुलाई की दोपहर ३ बजे IST, उनका ड्रैगन कैप्सूल प्रशांत महासागर में उतरने का अनुमान है, जो दक्षिण कैलिफ़ोर्निया के पास है। NASA के विज्ञान मंत्री जितेन्द्र सिंह ने भी इस पूरे अनडॉकिंग और स्प्लैशडाउन की पुष्टि की है।

मिशन की उपलब्धियां

टीम ने ISS पर करीब 14 से 17 दिन बिताए और लगभग 230 बार चक्कर लगाते हुए 6 मिलियन मील की दूरी तय की। उन्होंने बहुत ही सराहनीय वैज्ञानिक काम किया, जिसमें 60 से अधिक प्रयोग किए गए जिनमें से कई माइक्रोग्रेविटी पर आधारित थे विशेष तौर पर शुभांशु ने मूली (sprouts), सूक्ष्म एल्गी (microalgae), ग्लूकोज़ मॉनीटर और VR-EEG जैसे एक्सपीरियंस के साथ मानसिक अध्ययन भी किया। टीम में शामिल हैं – 

  • कमांडर: पेगी व्हिटसन – NASA 
  • पायलट: ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला – ISRO/IAF
  • मिशन स्पेशलिस्ट्स: स्लावोज़ उज़नान्स्की (पोलैंड), तिबोर कपु (हंगरी) 

इस मिशन के अंतर्गत 25 जून को SpaceX का Falcon 9 रॉकेट, केनेडी स्पेस सेंटर (फ्लोरिडा) से लॉन्च हुआ। ये भारत के लिए बहुत बड़ा मुकाम है क्योंकि शुभांशु पहले ऐसे भारतीय हैं जिन्होंने ISS पर काम किया।

शुभांशु की वापसी

शुभांशुका परिवार (लखनऊ) पूरे उत्साह और गर्व के साथ इस खुशी को मना रहा है। उनके माता और पिता को ख़ुशी है की शुभांशु वापस आ रहे हैं, हलांकि, अभी भी कठिनाइयों का सामना करना बाकी है।

अब, शुुभांशु को स्प्लैशडाउन के बाद करीब 7 दिनों का पुनःस्थापना (rehabilitation) कार्यक्रम से गुजरना होगा, ताकि वह धरती की गुरुत्वाकर्षण में फिर से अपना सामंजस्य बना सके। इस मेंथेरेपी और रीहैबिलिटेशन के जरिए वह जल्द ही पहले जैसी स्थिति में लौट आएंगे।

यह यात्रा केवल एक वैज्ञानिक मिशन ही नहीं, बल्कि भारत के मानवयुक्त अंतरिक्ष कार्यक्रम की एक अहम कड़ी है। 17 दिनों की मेहनत और अंतरराष्ट्रीय मिल-जुल कर किए गए प्रयोगों ने भारत के Gaganyaan योजना के लिए मजबूत आधार तैयार किया है।

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