Ranu Yadav: यह एक एक्शन थ्रिलर फिल्म है, जिसकी घोषणा एक्टर ने अपने 40वें जन्मदिन के मौके पर की थी।अपनी इस फिल्म राजकुमार राव अपनी बॉडी में जबरदस्त बदलाव किए नजर आ रहे है।
यह 2 घंटे 29 मिनट लंबी गैंगस्टर ड्रामा फिल्म है, जो एक साधारण आदमी के अपराध की दुनिया में जाने और सत्ता के शिखर तक पहुँचने सफर को दिखाती है। यह कहानी सिर्फ खून-खराबे और राजनीति की नहीं, बल्कि एक व्यक्ति की इच्छाओं, विश्वासघातों और आत्मा के खोने की प्रक्रिया की भी है।

कहानी:
मालिक की कहानी 1980 के दशक के प्रयागराज में सेट है। यह एक आम आदमी की यात्रा को दिखाती है, जो अपने जीवन में कुछ बड़ा करना चाहता है। रिश्तों में मिले धोखे और समाज में बढ़ते भेदभाव उसे धीरे-धीरे अपराध की ओर ले जाता है हैं। सत्ता की भूख उसे इस कदर अंधा कर देती है कि दोस्त उसके दुश्मन बन जाते हैं और वह खुद को ऐसे मोड़ पर पाता है जहाँ से लौटना मुश्किल होता है।

लेखन और निर्देशन:
मालिक फिल्म के लेखक है ज्योत्सना नाथ और पुलकित। लेखकों ने एक ऐसी कहानी रचने की कोशिश की है, जो एक्शन, राजनीति, दोस्ती, प्रेम और विश्वासघात जैसे तमाम तत्वों से भरपूर हो। शुरूआती हिस्से में फिल्म काफी मजबूत और आकर्षक लगती है। लेकिन जैसे-जैसे फिल्म आगे बढ़ती है, खासकर इंटरवल के बाद, उसकी पकड़ कमजोर होती जाती है।
क्या है कमियां?
कहानी कुछ जगहों पर बहुत धीमी गति पकड़ लेती है। कहानी की कुछ चीजें आगे ही पता चल जाती है कि अब क्या होगा जिससे फिल्म में रोमांच कम हो जाता है।राजकुमार के करैक्टर और अच्छे से दिखाने की ज़रूरत थी।राजकुमार जैसे मजबूत अभिनेता को अगर थोड़ा और दमदार अंदाज़ मिलता तो उनका किरदार ज़्यादा यादगार बन जाता।

क्या है खूबियां?
फिल्म में स्क्रिप्ट के तौर पर ताना-बाना अच्छा बुना गया है जो दर्शकों को सीट पर बिठाए रखता है।कुछ डायलॉग्स अच्छे हैं, हालांकि फिल्म की रफ्तार हर जगह एक जैसी नहीं है, लेकिन स्क्रीनप्ले में एक बहाव है. और हाँ, कुछ संवाद प्रभाव डालने वाले हैं।राजकुमार के साथ-साथ सभी कलाकारों का काम अच्छा है।
राजकुमार मालिक के किरदार में जमते हैं।उनका अभिनय सधा हुआ है और एक्शन करते हुए वो काफ़ी असली नजर आते है।बाकी कलाकारों ने भी अपने कैरक्टर को बखूबी निभाया है।

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