रिपोर्ट, काजल जाटव। भारतीय नर्स निमिषा प्रिया जिन्हे यमन सरकार ने फांसी की सजा सुना दी थी, को 16 जुलाई को फांसी की सजा दी जाएगी। निमिशा प्रिया 2017 से यमन सरकार की कैद में हैं क्योंकि उन पर आरोप है कि उन्होंने यमन के एक नागरिक तलाल अब्दो मेहदी को दवा का ओवरडोज देकर मार दिया था।
हाल ही में निमिशा की फांसी को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गयी है, जिसे स्वीकार कर लिया गया है, वरिष्ठ अधिवक्ता रागेन्थ वसंत ने याचिका दाखिल की है।
क्या है पूरा मामला?
नर्स निमिशा प्रिया जो मूल रूप से केरल की नागरिक हैं, 2011 में यमन आई थी। अस्पतालों में काम करने के बाद निमिषा ने मेहदी के साथ एक क्लिनिक खोला। जल्द ही निमिशा और महदी के बीच अनबन हो गयी क्योंकि वह उन्हें प्रताड़ित करने लगा था और निमिषा के क्लिनिक का प्रॉफिट भी हड़प लिया। महदी के कत्ल का आरोप निमिशा पर लगा। इसके बाद 2017 में महदी की मौत के लिए यमन सरकार ने निमिशा और अब्दुल हन्नान को दोषी ठहराया और दोनों को गिरफ्तार किया। निमिषा को 2020 में यमन के राष्ट्रपति ने मौत की सजा सुनाई थी।
मामले की सुनवाई
हाल ही में निमिशा की फांसी को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गयी है, जिसे स्वीकार कर लिया गया है, वरिष्ठ अधिवक्ता रागेन्थ वसंत ने याचिका दाखिल की है। मामले की सुनवाई जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस जयमाल्य की बैंच के द्वारा की जाएगी। निमिषा ने कोर्ट में माफ़ी के अपील भी दर्ज की जो की ख़ारिज कर दी गयी। राष्ट्रपति रशद ने 30 दिसंबर 2024 को सजा को मंजूरी दे दी थी। भारत सरकार ने इस पूरे मामले में अपनी तरफ से सक्रिय कदम उठा रहे हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने कहा कि सरकार न्युमिसा प्रिया और उनके परिवार को हर संभव मदद देने की कोशिश कर रही है।
ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, निमिषा प्रिया के मामले के संबंध में मीडिया के प्रश्नों के उत्तर में विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “हमें यमन में निमिषा प्रिया को सुनाई गई सजा की जानकारी है। हम समझते हैं कि प्रिया का परिवार प्रासंगिक विकल्पों पर विचार कर रहा है। सरकार इस मामले में हर संभव सहायता प्रदान कर रही है।”
