रजक रिपोर्ट, भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा में डिजिटल बदलाव की तैयारी के तहत लागू किया जाने वाला “ई-विधान प्रणाली” फिलहाल टाल दी गई है। इस सिस्टम को आगामी मानसून सत्र में लागू करने की योजना थी, लेकिन अब इसे अगले विधानसभा सत्र तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। कारण साफ है 250 टैबलेट्स की खरीद के लिए जरूरी एनआईसी (नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर) की अनुमति अभी तक नहीं मिल पाई है।
ई-विधान प्रणाली का मकसद विधानसभा की कार्यवाही को पेपरलेस बनाना था। यानी विधायकों की सीट पर एक टैबलेट लगाया जाना था, जिसमें वे सवाल-जवाब, दस्तावेज़ और अन्य कार्य देख सकते थे। साथ ही इससे विधानसभा की कार्यवाही को भी डिजिटल रूप से संचालित किया जाता। इससे न केवल कागज़ की बचत होती, बल्कि कार्यवाही को अधिक पारदर्शी और आधुनिक तरीके से चलाया जा सकता था।
क्या है ई-विधान प्रणाली?
ई-विधान प्रणाली यानी ऐसी विधानसभा व्यवस्था जहाँ पूरा कामकाज कागज़ रहित हो जाए। इसमें सवाल, सुझाव, बिल, रिपोर्ट, और नोटिस सब कुछ ऑनलाइन होता है। इसके लिए हर विधायक की सीट पर टैबलेट या स्क्रीन लगाई जाती है। इसके जरिए विधानसभा अध्यक्ष से लेकर विधायक तक सभी को डिजिटल सुविधा मिलती है।
अब क्यों टला ई-विधान सिस्टम ?
विधानसभा सचिवालय ने इस काम के लिए 250 टैबलेट खरीदने की योजना बनाई थी। लेकिन इनकी खरीदी के लिए एनआईसी की मंजूरी जरूरी थी, जो अब तक नहीं मिली। इस कारण फिलहाल यह काम रुक गया है। अब यह तय हुआ है कि टैबलेट खरीदने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अगली विधानसभा सत्र में इस सिस्टम को शुरू किया जाएगा।
स्पीकर, मुख्यमंत्री और विधायकों के सामने टैबलेट लगाए जाने थे
ई-विधान व्यवस्था के तहत विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर), मुख्यमंत्री और सभी विधायकों के सामने टैबलेट लगाए जाने थे। इसके जरिए वे हर दस्तावेज़ और कार्यवाही को रीयल टाइम देख और पढ़ सकते थे। सवाल पूछने से लेकर उत्तर देखने और नोट्स बनाने तक का पूरा काम डिजिटल होना था।
मानसून सत्र में दिखेगा पुराना सिस्टम
अब चूंकि ई-विधान प्रणाली को टाल दिया गया है, इसलिए 15 जुलाई से शुरू हो रहे मानसून सत्र में परंपरागत कागजी प्रणाली ही लागू रहेगी। विधानसभा की कार्यवाही पुराने ढर्रे पर चलेगी, जिसमें विधायक प्रश्नोत्तर, प्रस्ताव और अन्य दस्तावेज कागज़ के ज़रिए ही देखेंगे।
डिजिटल इंडिया की दिशा में यह एक बड़ा कदम माना जा रहा था, लेकिन तकनीकी प्रक्रिया में देरी के कारण इसे फिलहाल टालना पड़ा है। उम्मीद है कि आगामी सत्र में टैबलेट के ज़रिए विधायकों को पेपरलेस और स्मार्ट विधानसभा का अनुभव मिल सकेगा।
