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राजगढ़ जिले में बाल विवाह पर रोक लगाने के लिए पंचायत स्तर पर विवाह पंजीयन रजिस्टर को अनिवार्य बनाने की पहल, समाज में जागरूकता फैलाने पर दिया जा रहा जोर।

रिपोर्ट रोहित रजक राजगढ़। जिले में बाल विवाह की रोकथाम को लेकर एक नई पहल की गई है।

बुधवार को जनपद पंचायत राजगढ़ में आयोजित बैठक में अधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों ने बाल विवाह को जड़ से खत्म करने के लिए विवाह पंजीयन रजिस्टर को प्रभावी माध्यम बनाने पर चर्चा की।

इस बैठक का मुख्य उद्देश्य बाल विवाह की घटनाओं पर समय रहते नियंत्रण करना और समाज में जागरूकता फैलाना था।बैठक की अध्यक्षता मुख्य कार्यपालन अधिकारी आशीष जोशी ने की। उन्होंने कहा कि विवाह पंजीयन रजिस्टर केवल दस्तावेज भर नहीं है, बल्कि समाज में बदलाव लाने का एक सशक्त माध्यम बन सकता है।

अगर हर पंचायत में विवाह पंजीयन की प्रक्रिया को अनिवार्य किया जाए, तो समय से पहले हो रहे बाल विवाह जैसे अपराधों पर रोक लगाई जा सकती है। बैठक में सभी पंचायत सचिवों, रोजगार सहायकों और सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सीईओ आशीष जोशी ने कहा कि यदि ग्राम स्तर पर विवाह पंजीयन रजिस्टर को नियमित रूप से भरा जाएगा और उसका विश्लेषण किया जाएगा।

तो यह एक मजबूत निगरानी तंत्र के रूप में काम करेगा। इस प्रणाली से संबंधित अधिकारी समय रहते ऐसे मामलों का पता लगाकर कार्रवाई कर सकेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि कई ग्राम पंचायतों में पहले से ही सामाजिक कार्यकर्ताओं के सहयोग से रजिस्टर तैयार किया जा रहा है, जिसमें शादी की तारीख, वर-वधू की उम्र, परिवार की जानकारी आदि दर्ज की जाती है।

इस प्रक्रिया से यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि बाल विवाह जैसी घटनाएं न हों। इस अवसर पर आशीष जोशी ने पंचायत सचिवों से अपील की कि वे अपने गांव में विवाह पंजीयन रजिस्टर को नियमित रूप से भरें और इसकी निगरानी करें। उन्होंने कहा कि यह न केवल शासन की योजना का हिस्सा है, बल्कि समाज में नैतिक जिम्मेदारी भी है। अगर गांव-स्तर पर सही तरीके से निगरानी की जाए, तो बाल विवाह की घटनाएं स्वत: ही रुक सकती हैं।

बैठक में बताया गया कि समाज में बाल विवाह की जड़ें अभी भी मौजूद हैं, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में। वहां शिक्षा की कमी, परंपरागत सोच और जागरूकता के अभाव के कारण नाबालिग बच्चों की शादियां कर दी जाती हैं।

इन हालात में विवाह पंजीयन रजिस्टर एक सशक्त हथियार बन सकता है, जिससे प्रशासन को समय रहते जानकारी मिल सके। बैठक में उपस्थित एक रोजगार सहायक ने बताया कि कुछ क्षेत्रों में जब विवाह रजिस्टर की मांग की गई, तो कई अभिभावक बच्चों की उम्र छिपाने लगे। ऐसे में ग्राम स्तर पर आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और स्कूल शिक्षक भी इस मुहिम से जुड़े तो प्रभाव और भी गहरा होगा।

सीईओ जोशी ने कहा कि इस कार्य में सभी का सहयोग जरूरी है। उन्होंने पंचायत सचिवों को निर्देश दिए कि वे ग्रामीणों को विवाह पंजीयन के लाभ बताएं और इसके लिए जागरूकता अभियान चलाएं।

साथ ही यह भी सुनिश्चित करें कि कोई भी विवाह बिना पंजीयन के न हो। बैठक में यह भी सुझाव आया कि यदि विवाह पंजीयन रजिस्टर को आधार लिंक और स्कूल रिकॉर्ड से जोड़ा जाए, तो बाल विवाह की संभावनाएं और कम हो सकती हैं। साथ ही शासन स्तर पर सख्त निर्देश दिए जाएं कि जो विवाह बिना रजिस्टर के होंगे, उन पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।इस बैठक का मूल उद्देश्य यह था कि समाज में बाल विवाह जैसी कुप्रथा को पूरी तरह समाप्त किया जाए।

विवाह पंजीयन रजिस्टर को केवल एक दस्तावेजी प्रक्रिया न मानकर, एक सामाजिक सुधार के रूप में देखा जाए। अगर इस दिशा में सभी पंचायतें मिलकर कार्य करें, तो राजगढ़ जिला बाल विवाह मुक्त बन सकता है। समापन में अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि आगामी दिनों में ग्राम पंचायत स्तर पर विशेष निरीक्षण और समीक्षा अभियान चलाया जाएगा, ताकि इस योजना को पूरी गंभीरता से लागू किया जा सके।

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