
रोहित रजक। नई दिल्ली: देश में बढ़ते अपराध और आतंकवाद पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने राज्यों से अपील की है कि वे ‘नेटग्रिड’ (राष्ट्रीय खुफिया ग्रिड) के डेटा का अधिक सक्रिय और प्रभावी उपयोग करें।
केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन कार्य कर रही इस खुफिया ग्रिड का उद्देश्य विभिन्न एजेंसियों के बीच सूचना साझा कर आतंक और अपराध से जुड़ी गतिविधियों पर तेज़ी से कार्रवाई करना है।
नेटग्रिड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सभी राज्यों के पुलिस महानिदेशकों को एक चिट्ठी लिखकर आग्रह किया है कि वे अपने-अपने राज्यों की पुलिस को इस सिस्टम से अधिक जोड़ें और इसका नियमित उपयोग सुनिश्चित करें।
उन्होंने कहा कि अपराध और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को तेज़ करने के लिए तकनीक का उपयोग बेहद ज़रूरी है।पीयूष गोयल ने कहा कि कुछ राज्य नेटग्रिड का उपयोग प्रभावशाली ढंग से कर रहे हैं, जिनमें आंध्र प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान शामिल हैं।
उन्होंने इन राज्यों की सराहना करते हुए बाकी राज्यों से भी अनुरोध किया कि वे इससे सीख लें और इस प्लेटफॉर्म का नियमित, सक्रिय और तकनीकी रूप से सक्षम उपयोग करें।
क्या है नेटग्रिड?
नेटग्रिड एक राष्ट्रीय खुफिया ग्रिड है, जो आतंकवादी गतिविधियों, संगठित अपराध, ड्रग्स तस्करी, हवाला लेनदेन, नकली मुद्रा, मानव तस्करी और अन्य गंभीर अपराधों से जुड़ी सूचनाओं का एक बड़ा डेटाबेस है।
इसमें 11 केंद्रीय एजेंसियों और सभी राज्यों की पुलिस की जानकारी एकीकृत रूप से शामिल की जाती है। यह सिस्टम रियल टाइम में खुफिया और जांच एजेंसियों को जरूरी जानकारी उपलब्ध कराता है, जिससे समय पर कार्रवाई संभव हो सके।
राज्यों से क्या अपेक्षा है?
नेटग्रिड ने सभी राज्यों से कहा है कि वे अपने पुलिस बलों को इस प्रणाली के साथ जोड़ें और उसमें लॉग इन कर सूचनाओं को नियमित रूप से देखें और साझा करें।
यह भी कहा गया है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ-साथ खुफिया और जांच एजेंसियों के बीच रियल टाइम जानकारी का आदान-प्रदान अपराध पर नियंत्रण में मददगार होगा।
पीयूष गोयल ने पत्र में राज्यों से आग्रह किया है कि पुलिस बलों को नेटग्रिड के उपयोग के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाए। इसके लिए समय-समय पर राज्य स्तरीय प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएं और इसकी निरंतर समीक्षा हो ताकि कोई खामी न रह जाए।
उदाहरण बने कुछ राज्य
गृह मंत्रालय के अनुसार, आंध्र प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान जैसे राज्यों ने नेटग्रिड का उपयोग प्रभावी तरीके से किया है। इन राज्यों ने अपने पुलिस अधिकारियों को समय पर प्रशिक्षण दिया और उन्हें इस सिस्टम के साथ जोड़ा।
इस कारण इन राज्यों में कई आपराधिक मामलों में समय रहते कार्रवाई हो पाई। केंद्र सरकार ने कहा कि जनवरी 2025 तक सभी राज्यों को नेटग्रिड प्रणाली के साथ सक्रिय रूप से जुड़ना होगा।
देशभर में अपराध और आतंकवाद से निपटने के लिए तकनीक आधारित समाधान अब ज़रूरत बन चुका है। नेटग्रिड एक ऐसा प्लेटफॉर्म है, जो पुलिस और खुफिया एजेंसियों को एक मंच पर लाकर उन्हें ताकतवर बनाता है।
इसके बेहतर उपयोग से न केवल बड़ी साजिशों का समय पर खुलासा किया जा सकेगा, बल्कि आम जनता की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकेगी। अब देखना होगा कि बाकी राज्य इस दिशा में कितनी गंभीरता दिखाते हैं।
