
रोहित रजक: हिमाचल प्रदेश में एक बड़े नकली दवा रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। राज्य दवा नियंत्रण प्रशासन और केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की संयुक्त टीम ने एक गुप्त सूचना के आधार पर यह कार्रवाई की। इस कार्रवाई में भारी मात्रा में नकली और प्रतिबंधित दवाएं बरामद हुई हैं, जो आम लोगों के जीवन के लिए खतरनाक साबित हो सकती थीं।
संयुक्त टीम ने सिरमौर जिले के पांवटा साहिब में बस स्टैंड के पास स्थित एक किराए के मकान में छापा मारा। यह मकान एक कथित दवा डीलर के कब्जे में था, जिसके पास कोई वैध लाइसेंस नहीं था। जब टीम ने यहां छापा मारा तो वहां से कई प्रतिबंधित और नकली दवाएं जब्त की गईं।
इस मकान का लाइसेंस 25 दिसंबर 2028 तक वैध बताया गया था, लेकिन दवाओं के भंडारण और वितरण के लिए किसी तरह की अधिकृत अनुमति नहीं थी।
छापे में जो दवाएं जब्त हुईं, उनमें थायकोल्ब्लाकोसाइड और एज़िथ्रोमाइसिन प्रमुख थीं। थायकोल्ब्लाकोसाइड का उपयोग सूजन और मांसपेशियों में दर्द के इलाज में किया जाता है, जबकि एज़िथ्रोमाइसिन एक सामान्य लेकिन प्रभावशाली एंटीबायोटिक दवा है, जो सर्दी-जुकाम से लेकर गंभीर संक्रमणों तक के इलाज में काम आती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इन दवाओं का गलत और अनधिकृत तरीके से वितरण सीधे लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ है।टीम को शुरुआती जांच में पता चला कि आरोपी बिना लाइसेंस के दवाओं का भंडारण और बिक्री कर रहा था।
ये दवाएं हरियाणा से लाई जा रही थीं और यहां से उत्तर भारत के कई राज्यों में सप्लाई की जा रही थीं।दवाओं की पैकिंग असली जैसी दिखाई जाती थी ताकि कोई आसानी से पहचान न सके।
दवाओं की गुणवत्ता की जांच के लिए कुछ सैंपल प्रयोगशाला भेजे गए हैं। अधिकारियों को आशंका है कि इन नकली दवाओं में सक्रिय तत्वों की मात्रा या तो बहुत कम थी या बिल्कुल नहीं थी, जिससे मरीजों को लाभ की जगह नुकसान हो सकता है।
ड्रग इंस्पेक्टर डॉ. कमल कपूर ने जानकारी दी कि नकली दवाओं का यह नेटवर्क बहुत ही चालाकी से काम कर रहा था और इसका संचालन एक व्यवस्थित ढंग से किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि दवाओं का यह अवैध कारोबार लोगों के जीवन से जुड़ा अपराध है और इसमें शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
इस पूरे मामले में एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है और उससे पूछताछ की जा रही है। प्रारंभिक पूछताछ में उसने माना है कि वह काफी समय से इस काम में लगा हुआ था और उसे बाहर से दवाएं लाकर यहां सप्लाई करने के लिए अच्छा पैसा मिलता था।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इस गिरोह के और भी लोग अलग-अलग राज्यों में सक्रिय हो सकते हैं। इसलिए जांच को और विस्तार दिया जा रहा है। विभाग अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि इन नकली दवाओं की आपूर्ति किन-किन मेडिकल दुकानों या अस्पतालों में की गई थी।
डॉ. कपूर ने आम जनता से अपील की है कि वे दवाएं केवल अधिकृत मेडिकल स्टोर से ही खरीदें और अगर कहीं भी किसी संदेहास्पद गतिविधि की जानकारी हो, तो तुरंत प्रशासन को सूचित करें।
राज्य सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की तैयारी कर रही है। स्वास्थ्य मंत्री ने भी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नकली दवाओं से जुड़े मामलों में तत्काल और कठोर कार्रवाई की जाए।
यह मामला औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के अंतर्गत दर्ज किया गया है और आरोपी के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्यवाही शुरू कर दी गई है।
