रोहित रजक। चंडीगढ़: हरियाणा सरकार अब धर्मनगरी कुरुक्षेत्र को नई पहचान देने की दिशा में काम कर रही है इसके तहत सरकार ने फैसला लिया है कि कुरुक्षेत्र में भगवद गीता के 18 अध्यायों पर आधारित 18 भव्य द्वार बनाए जाएंगे। हर द्वार पर एक अध्याय की झलक और उसका संदेश दिखाया जाएगा।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की 82वीं बैठक में यह अहम निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हर द्वार की योजना जल्दी तैयार की जाए और निर्माण कार्य जल्द शुरू किया जाए।

सरकार का उद्देश्य है कि इन द्वारों के माध्यम से गीता के ज्ञान को लोगों तक पहुँचाया जाए और कुरुक्षेत्र को धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में और मजबूत किया जाए।

इन द्वारों पर आकर्षक चित्रों, श्लोकों और अध्यायों से जुड़ी बातें होंगी ताकि लोग गीता की गहराई को समझ सकें।इसके अलावा, गीता से जुड़ी श्रद्धा और पर्यटन को बढ़ाने के लिए सरकार गीता रथ, गीता म्यूजियम और रिसर्च सेंटर भी बनाएगी।

यहां गीता पर अध्ययन, शोध और प्रदर्शनी की सुविधा होगी। विद्यार्थियों, पर्यटकों और शोधकर्ताओं के लिए यह एक उपयोगी केंद्र बनेगा।

फिलहाल महिला थाने के पास पहले से मौजूद गीता द्वार और नजदीक स्थित सूर्य द्वार को और सुंदर बनाया जाएगा। इन दोनों द्वारों का नवीनीकरण किया जाएगा, जिससे वे और ज्यादा आकर्षक लगें।

इन 18 द्वारों को कुरुक्षेत्र की प्रमुख सड़कों और प्रवेश मार्गों पर स्थापित किया जाएगा। इनमें थानेसर-पिपली रोड, झांसा रोड, ब्रह्मसरोवर क्षेत्र, कुरुक्षेत्र-कैथल मार्ग और कुरुक्षेत्र के मुख्य एंट्री पॉइंट शामिल होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हर द्वार पर गीता के एक अध्याय की झलक होनी चाहिए। यह द्वार धार्मिक महत्व तो रखेंगे ही, साथ ही यह पर्यटन को भी बढ़ावा देंगे। आने वाले समय में देश-विदेश से लोग इन द्वारों को देखने और गीता का संदेश जानने के लिए आएंगे।

सरकार ने अधिकारियों से कहा है कि द्वारों की डिजाइन आकर्षक और ज्ञानवर्धक होनी चाहिए। इसके लिए आर्टिस्ट, शिल्पकार और वास्तुकारों की मदद ली जाएगी। हर द्वार को ऐसा बनाया जाएगा कि लोग रुककर उसे देखें और गीता का संदेश आत्मसात करें।

इसके अलावा, सरकार गीता जयंती महोत्सव को और बड़े पैमाने पर मनाने की योजना बना रही है। इस दौरान भारत और विदेशों से गीता पर काम करने वाले विद्वानों को बुलाया जाएगा। इससे कुरुक्षेत्र को विश्व स्तर पर “गीता की धरती” के रूप में पहचान मिलेगी।

सरकार को उम्मीद है कि जब यह सभी द्वार और अन्य योजनाएं पूरी होंगी, तब कुरुक्षेत्र न केवल एक धार्मिक स्थल होगा, बल्कि यह एक सांस्कृतिक, शैक्षणिक और आध्यात्मिक केंद्र के रूप में उभरेगा।

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