शिवानी यादव, रियो डी जनेरियोब्राजील के रियो डी जनेरियो नगर में आयोजित ब्रिक्स समूह के 17वें शिखर सम्मेलन में सदस्य राष्ट्रों ने संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में सुधार की पुरज़ोर मांग करते हुए भारत और ब्राज़ील को स्थायी सदस्य बनाने की सिफारिश की है। इस प्रस्ताव ने वैश्विक मंच पर विकासशील देशों की भूमिका को नई दिशा दी है।

घटना का संक्षिप्त परिचय

ब्रिक्स, जो ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन तथा दक्षिण अफ्रीका का सामूहिक मंच है, ने अपनी संयुक्त घोषणा में कहा कि अब समय आ गया है कि संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में समावेशी तथा प्रतिनिधित्वकारी दृष्टिकोण को अपनाया जाए। उन्होंने विशेष रूप से भारत और ब्राज़ील जैसे उभरते देशों को स्थायी सदस्यता देने की आवश्यकता पर बल दिया।

वर्तमान व्यवस्था की आलोचना

ब्रिक्स देशों ने यह भी कहा कि सुरक्षा परिषद की वर्तमान संरचना अब समयानुसार नहीं रही। आज के वैश्विक परिप्रेक्ष्य में एशिया, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका जैसे भूभागों की उपेक्षा किसी भी रूप में उचित नहीं है। परिषद को ऐसा स्वरूप दिया जाना चाहिए जो सभी क्षेत्रों और संस्कृतियों का न्यायपूर्ण प्रतिनिधित्व कर सके।

भारत और ब्राज़ील की पात्रता

भारत और ब्राज़ील दोनों ही राष्ट्र अनेकों बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अस्थायी सदस्य के रूप में अपनी भूमिका निभा चुके हैं। भारत आठ बार और ब्राज़ील दस बार इस भूमिका में रह चुके हैं। दोनों देशों ने शांति स्थापना अभियानों, वैश्विक न्याय, तथा पर्यावरणीय संरक्षण जैसे विषयों पर महत्वपूर्ण योगदान दिए हैं।

अन्य विषयों पर चर्चा

इस सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक और व्यापार संगठन जैसी संस्थाओं में भी सुधार की मांग उठाई गई। सदस्य राष्ट्रों ने यह स्पष्ट किया कि विश्व की आर्थिक और राजनीतिक संस्थाओं में विकसित और विकासशील राष्ट्रों के बीच संतुलन आवश्यक है। इसी क्रम में इंडोनेशिया को ब्रिक्स का नया सदस्य बनाया गया, जबकि बेलारूस, बोलीविया, कज़ाख़स्तान जैसे देशों को भागीदार राष्ट्र की मान्यता दी गई।

भविष्य

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता प्राप्त करने के लिए न केवल महासभा की स्वीकृति, बल्कि वर्तमान स्थायी सदस्यों का समर्थन भी आवश्यक होता है। रूस और चीन ने भारत व ब्राज़ील के प्रति अपने समर्थन की पुष्टि की है, जिससे इस प्रयास को वैश्विक समर्थन मिलने की संभावना और अधिक बढ़ गई है।

ब्रिक्स सम्मेलन में भारत और ब्राज़ील को स्थायी सदस्य बनाने की मांग केवल एक कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक व्यापक वैश्विक चेतना का संकेत है। यह प्रस्ताव वर्तमान विश्व व्यवस्था को और अधिक लोकतांत्रिक, समावेशी और न्यायपूर्ण बनाने की दिशा में एक ठोस कदम कहा जा सकता है। यदि यह प्रयास सफल होता है तो यह विकासशील देशों के लिए एक ऐतिहासिक परिवर्तन का वाहक सिद्ध हो सकता है।


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