दीपाली यदुवंशी: भारतीय ओलंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वे एथलेटिक्स की दुनिया के चमकते सितारे हैं। बेंगलुरु के कांतीरवा स्टेडियम में आयोजित “नीरज चोपड़ा क्लासिक 2025” प्रतियोगिता में उन्होंने 86.18 मीटर भाला फेंककर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस प्रतियोगिता को खुद नीरज ने अपने नाम से शुरू किया था, और इस साल यह आयोजन एक ऐतिहासिक मोड़ पर पहुंच गया।
दर्शकों का उत्साह और रिकॉर्ड तोड़ उपस्थिति
इस घरेलू आयोजन में 14,500 से अधिक दर्शकों ने हिस्सा लिया, जो किसी भारतीय ट्रैक और फील्ड प्रतियोगिता में अब तक की सबसे अधिक उपस्थिति मानी जा रही है। स्टेडियम में जैसे ही नीरज ने भाला फेंका, दर्शकों का उत्साह चरम पर पहुंच गया। हर उम्र के प्रशंसकों ने खड़े होकर तालियां बजाईं और “नीरज-नीरज” के नारे गूंज उठे।
‘मेरे लिए एक सपना था’: प्रदर्शन के बाद नीरज ने कहा, “यह सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि मेरे लिए एक सपना था कि भारत में भी एथलेटिक्स को वो मंच मिले, जो विदेशों में मिलता है। मुझे गर्व है कि आज लोग एथलेटिक्स को देखने आए।” उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य न सिर्फ खुद बेहतर प्रदर्शन करना है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्लेटफॉर्म तैयार करना भी है।
देश के लिए गर्व का पल :नीरज चोपड़ा पहले भारतीय खिलाड़ी हैं जिन्होंने टोक्यो ओलंपिक 2020 में एथलेटिक्स में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचा था। अब उन्होंने घरेलू स्तर पर भी उसी प्रेरणा और समर्पण को कायम रखा है। इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले अन्य खिलाड़ियों में शिवपाल सिंह (81.20 मी), डीपी मनु (80.11 मी), और पाकिस्तान के खिलाड़ी आरिफ हसन भी शामिल थे, लेकिन नीरज का प्रदर्शन सबसे अव्वल रहा।
भविष्य की दिशा
नीरज अब पेरिस ओलंपिक 2026 की तैयारी में जुट गए हैं। उन्होंने संकेत दिए हैं कि वे आने वाले समय में और अधिक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेंगे, लेकिन साथ ही देश में इस तरह के आयोजन भी नियमित रूप से कराने का प्रयास करेंगे।
“नीरज चोपड़ा क्लासिक” न केवल एक खेल प्रतियोगिता थी, बल्कि यह भारत में एथलेटिक्स की संस्कृति को बदलने की दिशा में एक सशक्त कदम भी साबित हुआ। नीरज चोपड़ा न सिर्फ एक खिलाड़ी हैं, बल्कि लाखों युवाओं के लिए एक प्रेरणा बन चुके हैं। उनका यह आयोजन इस बात का प्रतीक है कि जब जुनून और लक्ष्य साथ मिलते हैं, तो इतिहास बनता है।

