Deepali yaduwanshi नई दिल्ली, 4 जुलाई 2025 — भारत ने दुनिया के सबसे बड़े व्यापार संगठन WTO (World Trade Organization) में जवाबी टैरिफ की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है, ताकि अमेरिका द्वारा यात्री वाहनों और ऑटो पार्ट्स पर लगाए गए 25% के टैरिफ को कानूनी रूप से चुनौती दी जा सके।
इस अधिसूचना में भारत ने स्पष्ट किया है कि वह WTO की ‘सुरक्षा उपाय’ प्रावधानों के तहत अमेरिका से प्राप्त छूट या प्रतिबद्धताओं को निलंबित कर सकता है, ताकि अमेरिका द्वारा लगाए गए उच्च शुल्कों से उत्पन्न बिलियन के भारतीय निर्यात में होने वाले नुकसान को संतुलित किया जा सके। भारत का लक्ष्य है कि वह अमेरिका-उत्पादन वाले अमेरिकी उत्पादों पर $725 मिलियन के बराबर शुल्क लगाए।
हालांकि, भारत ने अभी यह निर्दिष्ट नहीं किया कि वह किस अमेरिकी उत्पादों पर कितना अतिरिक्त टैरिफ लगाऐगा
सरकार का रुख और रणनीति
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत किसी भी व्यापार समझौते को समयसीमा या किसी की चाह के आधार पर नहीं करेगा। किसी भी समझौते से पहले देशहित की आवश्यक शर्तों का पालन आवश्यक है। अमेरिका ने एक 26% टैरिफ की चेतावनी भी दी है यदि समझौता 9 जुलाई, 2025 तक नहीं होता है।
विवादित मुद्दे
भारत स्पष्ट रूप से कृषि और डेयरी क्षेत्रों को बाहर रखने पर जोर दे रहा है, जबकि अमेरिका इन क्षेत्रों में भारतीय बाजार खोलना चाहता है।
ट्रंप प्रशासन की ओर से कहा गया है कि यह नए टैरिफ ‘राष्ट्रीय सुरक्षा उपाय’ के अंतर्गत हैं—जो WTO के तहत बहस का विषय बना हुआ है ।
आने वाले संभावित परिणाम
1. वापसी संतुलन: दोनों देशों के बीच टैरिफ में संतुलन बना रहेगा, बशर्ते भारत सफलतापूर्वक WTO में अपनी दलील रख सके।
2. अंतरिम समझौते पर दबाव: चूंकि ट्रंप की 9 जुलाई डेडलाइन नजदीक है, इसलिए जल्द समझौता संभव है—लेकिन कृषि एवं ऑटो क्षेत्रों में उल्लंघन किसी भी समय रुकावट ला सकता है।
3. द्विपक्षीय वार्ता : भारत-अमेरिका आने वाले हफ्तों में अंतरिम व्यापार समझौते पर बातचीत जारी रखेंगे, जिसमें यह विवाद गहराई से सामने आ सकता है।
भारत ने अमेरिका के ऑटो टैरिफ का WTO में किया पलटवार
भारत ने स्पष्ट रूप से WTO में अपने व्यापार हितों की रक्षा के लिए कदम उठाया है। यह न केवल व्यापारिक आत्मनिर्भरता का संकेत है, बल्कि वैश्विक मंच पर उसकी भूमिका और आत्मविश्वास का भी प्रदर्शन है। वहीं, 9 जुलाई की डेडलाइन को देखते हुए, आने वाले दिनों में इस मसले की गंभीरता बनी रहेगी—”चाहे वह WTO की कानूनी लड़ाई हो या द्विपक्षीय व्यापार समझौता”
