अरूणिमा सिंह, भोपाल : उत्तर प्रदेश के मेरठ में सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने सख्त फैसला सुनाते हुए मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड की सज़ा सुनाई है। 14 अक्टूबर को सज़ा का ऐलान करते हुए जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा ने महाभारत का उल्लेख किया। अभियोजन पक्ष के वकील के मुताबिक, अदालत ने कहा कि अपराध की गंभीरता के अनुरूप दोषियों को दंड देना भी धर्म है।यह मामला मार्च 2025 में सौरभ राजपूत की हत्या और उनके शव को सीमेंट से भरे ड्रम में छिपाने से जुड़ा है। अदालत ने 30 सितंबर को मुस्कान और साहिल को हत्या तथा साक्ष्य मिटाने से संबंधित अपराधों में दोषी ठहराया था। इसके बाद अभियोजन पक्ष ने दोनों के लिए अधिकतम सज़ा की मांग की थी।
हत्या और सबूत मिटाने के मामले में सज़ा
द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने हत्या के मामले में दोनों दोषियों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। वहीं, साक्ष्य मिटाने से संबंधित अपराध में 20-20 हजार रुपये का अतिरिक्त जुर्माना लगाया गया। इस तरह प्रत्येक दोषी पर कुल 70 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने 22 गवाहों के बयान पेश किए। करीब 13 महीने चली सुनवाई में 126 बार कार्यवाही हुई। अभियोजन पक्ष ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों, तकनीकी जानकारी और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष रखा।
30 सितंबर को दोषी ठहराए गए थे दोनों
अदालत ने 30 सितंबर 2026 को मुस्कान और साहिल को हत्या तथा सबूत मिटाने से जुड़े अपराधों में दोषी करार दिया था। इसके बाद अभियोजन पक्ष ने दोनों के लिए मृत्युदंड की मांग की। 14 अक्टूबर को अदालत ने सज़ा सुनाई। मुकदमे के दौरान 126 सुनवाई हुईं और अभियोजन पक्ष के 22 गवाहों के बयान दर्ज किए गए।मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सज़ा सुनाए जाने के समय दोनों दोषियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश किया गया। सुनवाई से पहले जेल अधिकारियों ने बताया था कि दोनों तनाव में थे और उन्होंने सामान्य से कम भोजन किया था।
क्या था सौरभ राजपूत हत्याकांड?
यह मामला मार्च 2025 में सामने आया था। मेरठ के रहने वाले सौरभ राजपूत की गुमशुदगी की जांच के दौरान पुलिस को उनकी हत्या के बारे में पता चला। सौरभ मर्चेंट नेवी से जुड़े थे और फरवरी 2025 में लंदन से भारत लौटे थे।पुलिस की जांच के मुताबिक, 3 मार्च 2025 को मुस्कान और साहिल ने सौरभ की हत्या की थी। इसके बाद उनके शव को एक ड्रम में छिपाकर सीमेंट से बंद कर दिया गया। सौरभ के परिवार की ओर से उनकी गुमशुदगी की सूचना दिए जाने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।जांच के दौरान पुलिस को मुस्कान और साहिल पर संदेह हुआ। पूछताछ और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की कड़ियां जुड़ीं और पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार किया। इसके बाद ड्रम से सौरभ के शव के अवशेष बरामद किए गए।
जांच में सामने आया था वैवाहिक तनाव का मामला
सौरभ और मुस्कान ने वर्ष 2016 में प्रेम विवाह किया था। उनकी एक बेटी भी है। पुलिस की जांच में सौरभ और मुस्कान के वैवाहिक संबंधों में तनाव तथा साहिल के साथ मुस्कान की नजदीकी की बात सामने आई थी।जांच अधिकारियों के अनुसार, सौरभ के लंदन में रहने के दौरान मुस्कान और साहिल के बीच नजदीकियां बढ़ी थीं। पुलिस ने आरोप लगाया था कि इसी पृष्ठभूमि में दोनों ने हत्या की योजना बनाई। हालांकि, मामले में अदालत का फैसला अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहियों के आधार पर आया।
सौरभ के परिवार ने की थी कड़ी सज़ा की मांग
मामले के सामने आने के बाद सौरभ के परिवार ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी। सौरभ के भाई राहुल ने पहले कहा था कि परिवार शुरू से ही दोषियों को मृत्युदंड दिए जाने की उम्मीद कर रहा था।सौरभ की मां ने भी दोनों को कड़ी सज़ा देने की मांग की थी। 14 अक्टूबर को अदालत के फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया।
आगे की कानूनी प्रक्रिया भी अहम
मुस्कान और साहिल को सुनाई गई मृत्युदंड की सज़ा के बाद मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। कानून के अनुसार, सत्र न्यायालय द्वारा सुनाई गई मृत्युदंड की सज़ा को लागू करने से पहले संबंधित उच्च न्यायालय की पुष्टि आवश्यक होती है।
