आकांक्षा सिंह, भोपाल: पश्चिम बंगाल के नाम को लेकर एक बार फिर सियासत गरमा गई है। BJP ने राज्य का नाम बदलकर ‘पश्चिम बंग’ करने की तैयारी शुरू कर दी है। प्रदेश BJP अध्यक्ष शमीक भट्टाचार्य ने कहा है कि पार्टी जल्द विधानसभा में इस संबंध में विधेयक पेश करेगी। इस ऐलान के बाद राज्य के नाम को लेकर राजनीतिक बहस फिर तेज हो गई है।

‘बांग्ला’ नहीं, ‘पश्चिम बंग’
शमीक भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि BJP राज्य का नाम ‘बांग्ला’ करने के पक्ष में नहीं है। पार्टी की ओर से ‘पश्चिम बंग’ नाम प्रस्तावित किया जाएगा। BJP का तर्क है कि यह नाम राज्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को दर्शाता है। हालांकि, फिलहाल राज्य का आधिकारिक नाम पश्चिम बंगाल ही है।
नाम के पीछे की कहानी
राज्य के नाम का विवाद नया नहीं है। 1947 में बंगाल के विभाजन के बाद भारत में आए हिस्से को पश्चिम बंगाल कहा गया। BJP अब इसी ऐतिहासिक संदर्भ और राज्य की अलग पहचान को आधार बनाकर ‘पश्चिम बंग’ नाम की बात आगे बढ़ा रही है।
विधेयक कब आएगा?
BJP नेता के मुताबिक, नाम बदलने से जुड़ा विधेयक अगले विधानसभा सत्र में लाया जा सकता है। हालांकि, विधानसभा में बिल पेश होना नाम बदलने की अंतिम प्रक्रिया नहीं है। राज्य का नाम बदलने के लिए संविधान में तय प्रक्रिया से गुजरना होगा और केंद्र की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी।
यह पहली कोशिश नहीं
पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की कोशिश पहले भी कई बार हो चुकी है। अलग-अलग समय पर ‘पश्चिम बंग’ और ‘बांग्ला’ जैसे नामों को लेकर प्रस्ताव सामने आए। ममता बनर्जी सरकार ने भी राज्य का नाम ‘बांग्ला’ करने की पहल की थी, लेकिन केंद्र से मंजूरी नहीं मिलने के कारण मामला आगे नहीं बढ़ पाया।
अब विधानसभा से संसद तक जाएगा मामला?
अगर BJP विधानसभा में विधेयक पेश करती है तो इसके बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज हो सकती है। नाम बदलने की संवैधानिक प्रक्रिया में केंद्र और संसद की अहम भूमिका होती है। इसलिए विधानसभा से प्रस्ताव आने के बाद भी अंतिम फैसला तुरंत नहीं होगा। फिलहाल पश्चिम बंगाल का नाम वही है, लेकिन ‘पश्चिम बंग’ करने की BJP की पहल ने राज्य की राजनीति में एक नया मुद्दा जरूर खड़ा कर दिया है।
