रोहित रजक, भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नर्मदा परिक्रमा पथ के समग्र विकास की महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की।
अमरकंटक में “अमृत हरित महाअभियान” के शुभारंभ अवसर पर उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार नर्मदा परिक्रमा पथ को धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन के दृष्टिकोण से विकसित करेगी, जिससे क्षेत्र में रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने अमरकंटक से यात्रा की शुरुआत करते हुए पौधारोपण अभियान में भाग लिया। इस अभियान के तहत इस वर्ष प्रदेशभर में 4.31 करोड़ पौधे लगाए जा रहे हैं, जिनमें से 2.33 करोड़ पौधे नर्मदा किनारे रोपे जाएंगे। उन्होंने बताया कि 1450 किलोमीटर लंबा यह परिक्रमा पथ मध्यप्रदेश में स्थित है और इसे सुविधाजनक एवं सुरक्षित बनाने के लिए सरकार ठोस कदम उठा रही है।
अमरकंटक को बनाया जाएगा नया पर्यटन केंद्र
अमरकंटक, जहां से मां नर्मदा का उद्गम स्थल है, को अब एक अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां पर्यटकों के लिए धार्मिक स्थलों के साथ-साथ आधुनिक सुविधाओं का विकास किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि अमरकंटक के विकास से संपूर्ण विंध्य अंचल में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित योजनाओं में सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य सेवाएं, इंटरनेट कनेक्टिविटी और आवासीय सुविधा के अलावा श्रद्धालुओं के ठहरने और खाने की व्यवस्था पर विशेष जोर दिया जा रहा है। रक्षाबंधन से पहले बहनों को मिलेगा सौगातमुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में घोषणा की कि रक्षाबंधन से पहले ‘लाड़ली बहना आवास योजना’ के तहत पात्र बहनों को आवासीय पट्टे दिए जाएंगे।
डॉ. मोहन यादव की योजना से सशक्त होंगी बहनें
इस योजना के अंतर्गत 250 हजार बहनों को भूमि के पट्टे दिए जाएंगे और 1500 बहनों को गृह निर्माण हेतु चाबी सौंपी जाएगी। वहीं वर्ष 2028 तक 3 लाख बहनों को पक्के मकान देने का लक्ष्य रखा गया है। डॉ. मोहन यादव ने बताया कि यह योजना महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है।
उन्होंने कहा कि बहनों को आर्थिक रूप से सशक्त करने के लिए यह योजना एक संबल बनेगी।नर्मदा किनारे पौधारोपण और पर्यावरण सुरक्षाअमृत हरित महाअभियान के अंतर्गत इस वर्ष 4.31 करोड़ पौधे लगाए जाएंगे। इनमें से 2.33 करोड़ पौधे नर्मदा नदी के दोनों तटों पर रोपे जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि नर्मदा सिर्फ एक नदी नहीं, बल्कि आस्था और जीवनदायिनी शक्ति का प्रतीक है। नर्मदा के जल को स्वच्छ बनाए रखने और उसके किनारे के क्षेत्रों को हरित बनाए रखने के लिए यह बड़ा अभियान शुरू किया गया है।
पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए स्कूल, कॉलेज, सामाजिक संस्थाएं और स्वयंसेवी संगठन भी इस अभियान में भाग लेंगे। हर पौधे की जियो टैगिंग की जाएगी ताकि निगरानी की जा सके कि पौधे जीवित हैं या नहीं। समापनमुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की यह घोषणा न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे प्रदेश में पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और महिलाओं के लिए आवास सुरक्षा जैसे कई पहलुओं को मजबूती मिलेगी।

