अरूणिमा सिंह भोपाल : रियाद की ओर आई बैलिस्टिक मिसाइल को रोकने का सऊदी अरब का दावा, एयरपोर्ट के पास दिखा काला धुआं; हूतियों ने अरामको की यनबू सुविधा को निशाना बनाने की बात कही

यमन के हूती विद्रोहियों ने शनिवार को सऊदी अरब के कई इलाकों को निशाना बनाने का दावा किया। हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या अल-सरीया के मुताबिक, रियाद में कथित ‘संवेदनशील ठिकानों’ और लाल सागर के तट पर स्थित यनबू में सऊदी अरामको की सुविधाओं को बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों के साथ ड्रोन से निशाना बनाया गया।हालांकि, सऊदी अधिकारियों ने रियाद की ओर दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल को हवा में ही रोककर नष्ट करने की बात कही है। सऊदी पक्ष ने बिशा, ताइफ़, फ़रासान और यनबू में भी हमलों को नाकाम करने का दावा किया है। इन घटनाओं में बड़े पैमाने पर नुकसान या हताहतों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
रियाद एयरपोर्ट के पास दिखा धुआं
हमले के दौरान रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के आसपास आग और काले धुएं का गुबार देखा गया। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, कई धमाकों जैसी आवाजें सुनाई दीं और कुछ उड़ानों में देरी तथा रद्द होने की खबरें सामने आईं। सऊदी अधिकारियों ने लोगों को संभावित हवाई खतरे को लेकर अलर्ट भी जारी किया था।हूतियों ने इन हमलों को यमन की राजधानी सना पर सऊदी नेतृत्व वाले हमलों की प्रतिक्रिया बताया है। हूती विद्रोही लंबे समय से यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं, जिसे सऊदी अरब का समर्थन हासिल है।
अरामको के ठिकानों को निशाना बनाने का दावा
हूती प्रवक्ता ने दावा किया कि हमलों में बड़ी संख्या में मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया और यनबू स्थित सऊदी अरामको की ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाया गया। हालांकि, इन दावों के सभी हिस्सों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और अरामको की ओर से तत्काल कोई टिप्पणी सामने नहीं आई।यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब यमन के लाल सागर तट पर भी संघर्ष तेज हुआ है। हूती विद्रोहियों ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मोखा इलाके और आसपास के क्षेत्रों में अपनी स्थिति मजबूत की है। इससे लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों को लेकर भी चिंता बढ़ी है।
अमेरिका ने अपने नागरिकों को किया सतर्क
क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी विदेश विभाग ने मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी नागरिकों को सतर्क रहने और संभावित उड़ान रद्द होने तथा यात्रा में दूसरी परेशानियों के लिए तैयार रहने की सलाह दी है।तुर्की के विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि सऊदी अरब को अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे व्यापक संघर्ष में नहीं घसीटा जाना चाहिए। उनका कहना था कि क्षेत्र में जारी संकट के आर्थिक प्रभाव अब गंभीर होते जा रहे हैं।इस तरह हूतियों के ताजा हमलों ने यमन के संघर्ष को एक बार फिर सऊदी अरब की सुरक्षा, ऊर्जा ढांचे और लाल सागर के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों से जोड़ दिया है। साथ ही, तुर्की की ओर से सैन्य सहायता के संकेत ने नए मक्का रक्षा समझौते की भूमिका को भी चर्चा में ला दिया है।
रियाद में सायरन और धमाकों से दहशत
हमले के दौरान रियाद में हवाई हमले की चेतावनी देने वाले सायरन सुनाई दिए। शहर के कुछ इलाकों में लोगों ने लगातार धमाकों जैसी आवाजें सुनने की बात कही। एक स्थानीय निवासी ने बताया कि पहले अलार्म सुनाई दिया और इसके बाद उसके घर की खिड़कियां हिलने लगीं।रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास भी ईंधन टैंकों से काले धुएं का गुबार उठता देखा गया। इसके बाद कुछ उड़ानों में देरी और रद्द होने की खबरें सामने आईं। सऊदी सिविल डिफेंस ने भी रियाद और देश के कुछ अन्य हिस्सों में संभावित खतरे को लेकर मोबाइल फोन पर अलर्ट जारी किया था।
यमन में क्यों बढ़ रहा है संघर्ष?
हूतियों का यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के साथ लंबे समय से संघर्ष चल रहा है। सऊदी अरब इस सरकार का समर्थन करता है। हाल के दिनों में यमन के पश्चिमी तट पर लड़ाई तेज हुई है और हूती बलों की गतिविधियों के कारण बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं।अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) के अनुसार, 1 से 17 सितंबर 2026 के बीच करीब 1,14,498 लोग विस्थापित हुए, जबकि जून में संघर्ष बढ़ने के बाद से कुल विस्थापन का आंकड़ा करीब 1,18,086 लोगों तक पहुंच गया था।
तुर्की बोला- सऊदी को अमेरिका-ईरान युद्ध में नहीं घसीटना चाहिए
हाकान फिदान ने यह भी कहा कि सऊदी अरब को अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, सऊदी अरब इस संघर्ष में शामिल नहीं होना चाहता।फिदान ने कहा कि संकट के आर्थिक प्रभाव अब गंभीर हो रहे हैं और विभिन्न पक्षों के सामने संघर्ष को रोकने के लिए नए प्रस्ताव रखे गए हैं।
तुर्की ने सऊदी अरब को मदद का संकेत दिया
हमलों के बीच तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने कहा कि सऊदी अरब को सैन्य जरूरतें पड़ सकती हैं और तुर्की नए ‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौते’ के तहत उसकी मदद करने के लिए तैयार है। यह समझौता तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हुआ है।फिदान के मुताबिक, अगर सऊदी अरब को खास तौर पर तकनीकी सैन्य सहायता की जरूरत होती है तो तुर्की उसे पूरा करने में समस्या नहीं देखता। उन्होंने सऊदी अरब की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता पर हो रहे हमलों पर भी चिंता जताई।
यह समझौता अगस्त 2026 में हुआ था और इसमें तीनों देशों के बीच सामूहिक रक्षा का प्रावधान है। समझौते के अनुसार, किसी एक सदस्य पर सशस्त्र हमला तीनों के खिलाफ हमला माना जाएगा। हालांकि, किसी हमले की स्थिति में वास्तविक सैन्य सहायता किस रूप में दी जाएगी, यह परिस्थितियों और संबंधित देश की मांग पर निर्भर करेगा।

