शिवाजी कुमार सिंह: सऊदी अरब को F-35 देने पर अमेरिका में क्यों छिड़ा विवाद? चीन की चिंता से लेकर इजराइल की सैन्य बढ़त तक, समझिए पूरा मामला

अमेरिका ने सऊदी अरब को 48 अत्याधुनिक F-35 लड़ाकू विमानों की संभावित बिक्री का रास्ता साफ कर दिया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने करीब 24.3 अरब डॉलर के इस प्रस्तावित रक्षा सौदे को मंजूरी दी है। हालांकि, यह बिक्री अभी अंतिम रूप से पूरी नहीं हुई है और अमेरिकी कांग्रेस की समीक्षा बाकी है।

F-35 अमेरिका के सबसे आधुनिक लड़ाकू विमानों में शामिल है। इसकी स्टील्थ क्षमता, आधुनिक सेंसर और नेटवर्क आधारित युद्ध प्रणाली इसे बेहद उन्नत विमान बनाती है। इसी वजह से सऊदी अरब को F-35 देने का फैसला अमेरिका में सुरक्षा और क्षेत्रीय सैन्य संतुलन को लेकर बहस का विषय बन गया है।

आखिर विवाद क्यों हो रहा है?

इस सौदे को लेकर अमेरिका में मुख्य चिंता अमेरिकी सैन्य तकनीक की सुरक्षा को लेकर है। कुछ अमेरिकी सांसदों और रक्षा विशेषज्ञों को आशंका है कि सऊदी अरब के चीन के साथ बढ़ते संबंधों के कारण संवेदनशील अमेरिकी तकनीक की सुरक्षा को लेकर जोखिम पैदा हो सकता है।

हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि सऊदी अरब अमेरिकी F-35 तकनीक चीन को देगा। फिलहाल यह सुरक्षा संबंधी आशंका और राजनीतिक बहस है, इसकी कोई पुष्टि नहीं हुई है।

इजराइल के लिए क्यों महत्वपूर्ण है F-35 सौदा?

इस मामले में इजराइल का मुद्दा भी बेहद महत्वपूर्ण है। अमेरिका की लंबे समय से नीति रही है कि मध्य पूर्व में इजराइल की Qualitative Military Edge (QME) यानी सैन्य गुणवत्ता की बढ़त को बनाए रखा जाए। अमेरिकी कानून में भी इस बढ़त को बनाए रखने की नीति को महत्व दिया गया है।

F-35 के मामले में यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इजराइल अभी मध्य पूर्व में F-35 का संचालन करने वाला देश है। ऐसे में सऊदी अरब को भी यही विमान देने से क्षेत्रीय सैन्य संतुलन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सऊदी अरब को F-35 मिलने से इजराइल की सैन्य बढ़त अपने आप खत्म हो जाएगी। अमेरिका को बिक्री के दौरान इजराइल की QME को ध्यान में रखना होता है।

कांग्रेस की क्या भूमिका है?

यह अभी केवल संभावित बिक्री है। अमेरिकी विदेश विभाग की मंजूरी के बाद इस प्रस्ताव पर अमेरिकी कांग्रेस की समीक्षा होनी है। Reuters के मुताबिक प्रस्तावित सौदा कांग्रेस की मंजूरी के अधीन है।

यानी अभी यह कहना सही नहीं होगा कि 48 F-35 विमान सऊदी अरब को मिल गए हैं। फिलहाल अमेरिका ने बिक्री की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की मंजूरी दी है।

सौदे में क्या शामिल है?

Reuters के अनुसार प्रस्तावित पैकेज में 48 F-35 लड़ाकू विमान और 49 संबंधित इंजन शामिल हैं। इसके साथ विमान से जुड़ा उपकरण, सहायता और अन्य संबंधित व्यवस्थाएं भी प्रस्ताव का हिस्सा हैं। कुल अनुमानित कीमत करीब 24.3 अरब डॉलर है।

F-35 को अमेरिकी कंपनी Lockheed Martin बनाती है, जबकि इसके इंजन Pratt & Whitney से जुड़े हैं।

अमेरिका सऊदी अरब को F-35 क्यों देना चाहता है?

अमेरिका और सऊदी अरब के बीच लंबे समय से सुरक्षा और रक्षा सहयोग है। ट्रंप प्रशासन ने भी सऊदी अरब के साथ रक्षा संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया है।

अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि सऊदी अरब की सुरक्षा मजबूत करना क्षेत्रीय सुरक्षा और अमेरिका-सऊदी रणनीतिक साझेदारी के लिए महत्वपूर्ण है। अमेरिकी विदेश विभाग ने प्रस्तावित बिक्री के बारे में कहा है कि इससे सऊदी अरब की सुरक्षा क्षमता मजबूत होगी और यह अमेरिका की विदेश नीति तथा राष्ट्रीय सुरक्षा के लक्ष्यों के अनुरूप है।

चीन का मुद्दा इतना बड़ा क्यों है?

सऊदी अरब के चीन के साथ आर्थिक और रणनीतिक संबंध हैं। इसी वजह से कुछ अमेरिकी सांसदों को चिंता है कि अत्याधुनिक अमेरिकी रक्षा तकनीक की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी।

F-35 केवल एक सामान्य लड़ाकू विमान नहीं है। इसमें अत्याधुनिक सेंसर, सॉफ्टवेयर और नेटवर्किंग तकनीक शामिल है। इसलिए अमेरिका के लिए इस तकनीक की सुरक्षा महत्वपूर्ण है।

लेकिन यहां एक बात स्पष्ट रखना जरूरी है—सऊदी अरब द्वारा अमेरिकी F-35 तकनीक चीन को साझा करने की कोई पुष्टि नहीं हुई है। यह उन अमेरिकी सांसदों की ओर से उठाई गई सुरक्षा संबंधी आशंका है जो इस सौदे का विरोध या कड़ी जांच चाहते हैं।

सऊदी अरब और यमन के हूतियों का क्या संबंध है?

सऊदी अरब की सुरक्षा चिंताओं को यमन में हूती संघर्ष के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। ताजा Reuters रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2026 में सऊदी अरब और ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के बीच सीमा-पार हमले फिर तेज हुए हैं।

इस क्षेत्रीय तनाव के बीच सऊदी अरब अपनी सैन्य क्षमता और सुरक्षा साझेदारियों को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। यही व्यापक सुरक्षा माहौल F-35 जैसे अत्याधुनिक हथियारों की मांग के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।

खाशोज्जी हत्याकांड का मुद्दा भी उठा

सऊदी अरब के साथ अमेरिकी हथियार सौदों को लेकर पहले भी अमेरिकी कांग्रेस में सवाल उठ चुके हैं। 2018 में पत्रकार जमाल खाशोज्जी की हत्या के बाद अमेरिका-सऊदी संबंधों और हथियार बिक्री को लेकर अमेरिकी राजनीति में बहस तेज हुई थी।

इसलिए F-35 सौदे की कांग्रेस में समीक्षा केवल सैन्य तकनीक तक सीमित नहीं रह सकती; सऊदी अरब के साथ अमेरिका के व्यापक सुरक्षा और राजनीतिक संबंध भी चर्चा का हिस्सा बन सकते हैं।

क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?

अगर यह बिक्री आगे बढ़ती है, तो इसका असर अमेरिका-सऊदी रक्षा संबंधों के साथ-साथ मध्य पूर्व के सैन्य संतुलन, इजराइल की Qualitative Military Edge और अमेरिकी सैन्य तकनीक की सुरक्षा पर होने वाली बहस पर पड़ सकता है। फिलहाल इन मुद्दों पर अमेरिकी कांग्रेस में समीक्षा और चर्चा महत्वपूर्ण अगला चरण है।

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