अरूणिमा सिंह भोपाल नई दिल्ली: भारत और चीन के रिश्तों में लंबे समय बाद एक नई गर्माहट के संकेत मिल रहे हैं। 2020 की गलवान झड़प के बाद पहली बार भारत पहुंचे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बातचीत में दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।
जिनपिंग ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भारत और चीन को मिलकर काम करने की जरूरत है।ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत आए शी जिनपिंग ने बातचीत के दौरान दोनों देशों की वैश्विक भूमिका का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत और चीन दुनिया के दो सबसे अधिक आबादी वाले देश हैं और ग्लोबल साउथ के महत्वपूर्ण सदस्य हैं।
ऐसे में दोनों देशों की जिम्मेदारी है कि वे अपने लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए सहयोग को आगे बढ़ाएं।जिनपिंग ने ब्रिक्स के मंच पर उच्च गुणवत्ता वाले सहयोग को बढ़ाने की जरूरत बताई। साथ ही उन्होंने बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था और समावेशी आर्थिक वैश्वीकरण की वकालत की। उनके मुताबिक, भारत और चीन का सहयोग वैश्विक शांति, स्थिरता और विकास में सकारात्मक भूमिका निभा सकता है।
मोदी ने कहा- मतभेदों को विवाद नहीं बनने देना चाहिए
बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-चीन संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से आगे बढ़ाने पर जोर दिया। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, दोनों नेताओं ने अगस्त 2025 में तियानजिन में हुई । पिछली बैठक के बाद द्विपक्षीय संबंधों में हुई प्रगति का स्वागत किया।
पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन उन्हें विवाद में बदलने से बचना जरूरी है। उन्होंने आपसी सम्मान, आपसी संवेदनशीलता और आपसी हित को भारत-चीन संबंधों की दिशा तय करने वाला आधार बताया।
गलवान के बाद पहली भारत यात्रा
15 जून 2020 को गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद भारत और चीन के संबंधों में तनाव काफी बढ़ गया था। सीमा पर तनाव के बीच दोनों देशों के बीच आर्थिक और व्यापारिक गतिविधियां हालांकि जारी रहीं।आंकड़ों के अनुसार, 2020-21 में चीन से भारत का आयात करीब 65 अरब डॉलर था, जो 2025-26 में बढ़कर 132 अरब डॉलर से अधिक हो गया। यानी इस दौरान चीन से भारत का आयात लगभग दोगुना हो गया।
सात साल बाद भारत आए चीनी राष्ट्रपति
शी जिनपिंग करीब सात साल बाद भारत पहुंचे हैं। पालम एयरपोर्ट पर केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने उनका स्वागत किया। गलवान झड़प के बाद जिनपिंग का यह पहला भारत दौरा है।ब्रिक्स सम्मेलन के बीच मोदी-जिनपिंग की यह मुलाकात इसलिए अहम है क्योंकि दोनों देशों के बीच सीमा विवाद के साथ-साथ व्यापार और रणनीतिक संबंधों को लेकर भी कई महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।
