Muskan Garg: डिजिटल मीडिया की दुनिया में अपनी बेबाक पत्रकारिता और दमदार कंटेंट के जरिए 75,000 से अधिक लोगों का दिल जीतने वाले ‘The Devu Talks’ के फाउंडर देवश्य पाराशर ने अब साहित्य जगत में शानदार एंट्री कर ली है। उनकी बहुप्रतीक्षित पहली हिंदी लव स्टोरी ‘बस ढूंढ रहा हूं मैं तुमको’ (बनारस की पार्वती) आधिकारिक तौर पर रिलीज हो चुकी है। किताब के बाजार में आते ही युवाओं और साहित्य प्रेमियों के बीच इसे लेकर उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है।
बनारस के घाटों से निकली एक अधूरी मोहब्बत की रूहानी दास्तान:
करीब 40,000 शब्दों में लिखी गई यह नॉन-फिक्शन लव स्टोरी राजमंगल प्रकाशन के बैनर तले प्रकाशित हुई है। कहानी की आत्मा बनारस की गलियों, घाटों और वहां की सांझ की खूबसूरती से जुड़ी हुई है। इसकी केंद्रीय किरदार ‘पार्वती’ कहानी को एक ऐसा भावनात्मक स्पर्श देती है, जो पाठकों को अपनी दुनिया में खींच लेता है।
देवश्य ने अपनी लेखनी के जरिए डिजिटल दौर में सच्चे प्रेम, इंतजार और अधूरी तलाश के एहसास को बेहद खूबसूरती से शब्दों में पिरोया है। जो भी पाठक इस किताब को पढ़ रहा है, वह बनारस के एहसास और कहानी के किरदारों में खोता नजर आ रहा है।
पत्रकार से लेखक: शब्दों के जरिए दिलों तक पहुंचने की नई उड़ान:
ब्रॉडकास्ट जर्नलिज्म के छात्र और एक सफल डिजिटल इन्फ्लुएंसर के रूप में अपनी पहचान बना चुके देवश्य पाराशर ने इस किताब से यह साबित कर दिया है कि उनकी पहचान सिर्फ खबरों और कंटेंट तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके शब्दों में भावनाओं को गहराई से छू लेने की ताकत भी है।
किताब को लेकर अपनी भावनाएं साझा करते हुए देवश्य कहते हैं:
“यह किताब सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि मेरे दिल का एक हिस्सा है, जिसे मैंने बनारस की गलियों, यादों और भावनाओं से बुना है। पाठकों का मिल रहा प्यार मेरे लिए बेहद खास और भावुक कर देने वाला है।”
सोशल मीडिया पर बधाइयों की बारिश, फैंस ने बनाया खास माहौल:
किताब रिलीज होते ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ‘The Devu Talks’ के फैंस, साथी कंटेंट क्रिएटर्स और साहित्य प्रेमियों ने देवश्य को बधाइयों से भर दिया। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स और किताबों की दुकानों पर लोग इस किताब के साथ तस्वीरें शेयर कर रहे हैं और अपने अनुभव भी साझा कर रहे हैं।
साहित्य समीक्षकों का मानना है कि देवश्य की यह कृति आधुनिक हिंदी प्रेम कहानियों की दुनिया में एक नया ट्रेंड सेट कर सकती है।
क्या आप तैयार हैं बनारस की इस रूहानी यात्रा का हिस्सा बनने के लिए?
अगर आपने अब तक ‘बस ढूंढ रहा हूं मैं तुमको’ की अपनी कॉपी ऑर्डर नहीं की है, तो शायद आप एक खूबसूरत एहसास से दूर हैं। बनारस की गलियों, अधूरी मोहब्बत और एक गहरी तलाश की इस कहानी का हिस्सा बनने के लिए अपनी कॉपी आज ही सुरक्षित करें।
