Muskan Garg: इंदौर के एग्रीकल्चर कॉलेज में आयोजित कबीर जन उत्सव–2026 के दौरान वरिष्ठ कवि–कथाकार एवं रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री संतोष चौबे को ‘राष्ट्रीय शबद निरंतर सम्मान–2026’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें कबीर की वाणी को जन-जन तक पहुँचाने के उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए प्रदान किया गया।
लोकगायन के सुरों में सजी कबीर की महिमा:
विश्वविख्यात कबीर लोकगायकों — पद्मश्री प्रहलादसिंह टिपाणिया, पद्मश्री कालूराम बामनिया और पद्मश्री भेरूसिंह चौहान ने अपने करकमलों से श्री चौबे को सम्मानित किया। इस अवसर पर इन कलाकारों ने कबीर के पदों की मनमोहक प्रस्तुतियाँ देकर पूरे वातावरण को आध्यात्मिक भाव से भर दिया।
समकालीन संदर्भ में कबीर की प्रासंगिकता पर विचार:
अपने प्रभावशाली वक्तव्य में श्री संतोष चौबे ने कहा कि आज जब दुनिया के कई हिस्सों में संघर्ष और अशांति का माहौल है, ऐसे समय में कबीर के प्रेम, करुणा और मानवता के संदेश पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गए हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा कि — “विश्व को आज कबीर के ढाई आखर ‘प्रेम’ की सबसे अधिक आवश्यकता है।”
भक्ति, तर्क और संवेदना का अद्भुत संगम:
श्री चौबे ने कबीर को उत्तर भारत के भक्ति आंदोलन का प्रथम कवि और भारतीय आधुनिकता का प्रतिनिधि बताया। उन्होंने कहा कि कबीर की वाणी में प्रेम, करुणा और तार्किकता का अद्भुत संतुलन है।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि आज भले ही लोग गूगल या एआई को गुरु मान रहे हैं, लेकिन उनमें भावनात्मक गहराई और मार्गदर्शन का अभाव है, जो कबीर की शिक्षाओं में सहज रूप से मिलता है।
लोकसंस्कृति के संरक्षण का अनुकरणीय प्रयास:
कबीर जन विकास समूह, कबीर जन उत्सव समिति और ढाई आखर संस्था द्वारा पिछले 33 वर्षों से निरंतर इस उत्सव का आयोजन किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य कबीर की शिक्षाओं को समाज के हर वर्ग तक पहुँचाना है।
कवि कृष्णकांत निलोसे को स्वरांजलि:
कार्यक्रम की शुरुआत में दिवंगत कवि कृष्णकांत निलोसे को याद करते हुए उन्हें भावपूर्ण स्वरांजलि अर्पित की गई।
कार्यक्रम में समाजसेवी अनिल भंडारी, राजेन्द्र गोयल और भागचंद पटेल बतौर अतिथि उपस्थित रहे। अतिथियों का स्वागत सुरेश पटेल एवं चारूशिला मौर्य ने किया, जबकि संचालन छोटू भारती ने किया।
साहित्य और संस्कृति जगत ने दी शुभकामनाएँ:
इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए श्री संतोष चौबे को विश्व रंग फाउंडेशन, टैगोर अंतरराष्ट्रीय हिंदी केंद्र, प्रवासी भारतीय साहित्य एवं संस्कृति शोध केंद्र, टैगोर विश्व कला एवं संस्कृति केंद्र, रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, स्कोप ग्लोबल स्किल्स विश्वविद्यालय, डॉ. सी.वी. रामन विश्वविद्यालय सहित अनेक संस्थाओं और साहित्य–संस्कृति जगत के लोगों ने हार्दिक बधाई दी।
यह सम्मान न केवल श्री संतोष चौबे की साहित्यिक यात्रा का गौरव है, बल्कि कबीर की अमर वाणी को आज के समय में जीवंत बनाए रखने की एक प्रेरणादायक पहल भी है।
