Baljinder Kaur: गुरुवार सुबह दिल्ली और मुंबई समेत देश के कई बड़े हवाई अड्डों पर यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। एयरलाइंस के बुकिंग और चेक-इन सिस्टम ‘नेविटेयर’ में आई तकनीकी खराबी के कारण हजारों यात्री समय पर चेक-इन नहीं कर सके। करीब 45 मिनट तक सिस्टम ठप रहने से एयरपोर्ट पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
सुबह 6:45 बजे सामने आई समस्या
दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सुबह करीब 6:45 बजे नेविटेयर सिस्टम में गड़बड़ी सामने आई। यह समय एयरपोर्ट पर सबसे ज्यादा भीड़ का होता है, क्योंकि सुबह की फ्लाइट्स के लिए बड़ी संख्या में यात्री पहुंचते हैं। सिस्टम ठप होने के कारण एयरलाइंस कर्मचारियों को यात्रियों का डेटा मैन्युअल तरीके से संभालना पड़ा, जिससे प्रक्रिया काफी धीमी हो गई।
लंबी कतारों से यात्रियों की बढ़ी परेशानी
तकनीकी खराबी के चलते चेक-इन काउंटरों पर लंबी-लंबी कतारें लग गईं। कई यात्रियों ने सोशल मीडिया पर देरी और अव्यवस्था की शिकायत की। कुछ यात्रियों को डर था कि वे अपनी उड़ानें मिस न कर दें। एयरपोर्ट स्टाफ ने स्थिति को संभालने की कोशिश की, लेकिन सिस्टम की दिक्कत के कारण सामान्य कामकाज प्रभावित रहा।
कई बड़ी एयरलाइंस हुईं प्रभावित
इस गड़बड़ी का असर इंडिगो, अकासा एयर और एयर इंडिया एक्सप्रेस समेत कई एयरलाइंस पर पड़ा। इंडिगो ने लगभग 25 मिनट के भीतर अपने सिस्टम को आंशिक रूप से बहाल कर लिया था। हालांकि, नेविटेयर का पूरा सिस्टम सुबह करीब 8:25 बजे तक पूरी तरह से ठीक हो पाया।
मुंबई एयरपोर्ट पर भी दिखा असर
दिल्ली के अलावा मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भी इसी तरह की स्थिति देखने को मिली। वहां भी यात्रियों को चेक-इन में देरी और भीड़भाड़ का सामना करना पड़ा। सुबह के व्यस्त समय में आई इस खराबी ने यात्रियों की यात्रा योजनाओं पर असर डाला।
क्या है नेविटेयर सिस्टम?
नेविटेयर एक महत्वपूर्ण तकनीकी प्लेटफॉर्म है जिसका उपयोग एयरलाइंस, टिकट बुकिंग, चेक-इन और बोर्डिंग प्रक्रिया के लिए करती हैं। जब इस तरह का सिस्टम अचानक बंद हो जाता है, तो एयरलाइंस के लिए यात्रियों को समय पर सेवा देना मुश्किल हो जाता है। इससे उड़ानों में देरी और अव्यवस्था की स्थिति पैदा हो जाती है।
पहले भी हो चुकी है ऐसी घटना
यह पहली बार नहीं है जब तकनीकी खराबी के कारण एयरपोर्ट संचालन प्रभावित हुआ हो। पिछले साल नवंबर में दिल्ली हवाई अड्डे पर वायु यातायात नियंत्रण प्रणाली में आई खराबी के कारण 800 से अधिक उड़ानें देरी से चली थीं। दिल्ली एयरपोर्ट रोजाना करीब 1,500 उड़ानों का संचालन करता है, जबकि मुंबई एयरपोर्ट से लगभग 1,000 उड़ानें संचालित होती हैं। ऐसे में छोटी सी तकनीकी गड़बड़ी भी बड़े स्तर पर असर डाल सकती है।
तकनीकी खामियों से मिली इस सीख के बाद अब सवाल यह है कि क्या एयरलाइंस और हवाई अड्डे भविष्य में ऐसी बाधाओं से निपटने के लिए और मजबूत बैकअप व्यवस्था तैयार करेंगे, ताकि यात्रियों को दोबारा ऐसी परेशानी न हो।
