Muskan Garg: श्रावण मास के सोमवासर और विशेष धार्मिक अवसर पर काशी विश्वनाथ धाम एक बार फिर भक्ति, आस्था और राष्ट्रभक्ति के अद्भुत संगम का साक्षी बना। वाराणसी स्थित इस पावन धाम में सोमवासरीय रूद्राभिषेक का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें श्री अविमुक्तेश्वर महादेव का आकर्षक तिरंगा श्रृंगार किया गया। जैसे ही बाबा विश्वनाथ का यह अलौकिक स्वरूप भक्तों के सामने आया, पूरा धाम “हर-हर महादेव” और “जय भारत माता” के जयघोष से गूंज उठा।

सोमवासरीय रूद्राभिषेक का विशेष महत्व:
हिंदू धर्म में श्रावण मास और सोमवार का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि सोमवासरीय रूद्राभिषेक करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों के सभी कष्ट दूर करते हैं। काशी विश्वनाथ धाम में विधि-विधान से मंत्रोच्चार के साथ रूद्राभिषेक किया गया, जिसमें वेद मंत्रों, रुद्राष्टाध्यायी और शिव स्तुति की दिव्य ध्वनि वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भरती रही।

तिरंगा श्रृंगार: आस्था के साथ राष्ट्रभक्ति का संगम:
इस अवसर पर श्री अविमुक्तेश्वर महादेव का केसरिया, श्वेत और हरित रंगों से विशेष श्रृंगार किया गया, जो भारतीय तिरंगे का प्रतीक था। बाबा के मस्तक पर भस्म, पुष्पों और वस्त्रों के माध्यम से किया गया यह श्रृंगार भक्तों के लिए अद्भुत आकर्षण का केंद्र बना। यह दृश्य न केवल धार्मिक आस्था को प्रबल करता दिखा, बल्कि राष्ट्रप्रेम की भावना को भी जागृत करता नजर आया।

भक्तों की उमड़ी आस्था, काशी में बना उत्सव का माहौल:
रूद्राभिषेक और तिरंगा श्रृंगार के दर्शन के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। देश के कोने-कोने से आए भक्तों ने बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस किया। मंदिर में भजन-कीर्तन और शंखनाद ने भक्तिमय वातावरण बनाए रखा।

काशी: जहां धर्म और राष्ट्र एक साथ चलते हैं:

काशी विश्वनाथ धाम सदैव से धार्मिक चेतना के साथ-साथ सांस्कृतिक और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक रहा है। तिरंगा श्रृंगार के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि आस्था और देशभक्ति एक-दूसरे के पूरक हैं। बाबा अविमुक्तेश्वर के इस स्वरूप ने हर श्रद्धालु के मन में गर्व और श्रद्धा दोनों का संचार किया।

सोमवासरीय रूद्राभिषेक के अवसर पर काशी विश्वनाथ धाम में हुआ तिरंगा श्रृंगार केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और राष्ट्रप्रेम का सजीव प्रतीक बनकर सामने आया। बाबा विश्वनाथ का यह दिव्य रूप भक्तों के मन में लंबे समय तक श्रद्धा और ऊर्जा का संचार करता रहेगा।

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