Muskan Garg: जिस खिलाड़ी ने देश के लिए राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया, उसी के साथ रेलवे स्टेशन पर ऐसा व्यवहार हुआ जिसने पूरे खेल जगत को शर्मसार कर दिया। राष्ट्रीय रिकॉर्डधारी पोल वॉल्ट एथलीट देव कुमार मीणा और उनके कोच घनश्याम को मैंगलोर से लौटते समय पनवेल स्टेशन पर ट्रेन से उतार दिया गया। वजह थी उनका खेल उपकरण, यानी कीमती पोल वॉल्ट पोल्स।

पनवेल स्टेशन पर क्या हुआ?
जानकारी के अनुसार, देव कुमार मीणा और उनके कोच एक प्रतियोगिता के बाद मैंगलोर से अपने गंतव्य की ओर लौट रहे थे। उनके साथ पोल वॉल्ट के लिए जरूरी लंबे और महंगे पोल्स थे, जिन्हें उन्होंने सुरक्षित तरीके से रखा हुआ था। लेकिन पनवेल स्टेशन पर टिकट जांच कर्मचारी (TTE) ने इन्हें रेलवे नियमों के खिलाफ सामान बताते हुए ट्रेन से उतरने का आदेश दे दिया।

कोच के हाथ जोड़े, फिर भी नहीं पसीजा दिल:
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कोच घनश्याम ने TTE के सामने बार-बार हाथ जोड़कर विनती की। उन्होंने बताया कि ये पोल्स कोई सामान्य सामान नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर के एथलीट का खेल उपकरण हैं, जिनके बिना खिलाड़ी अभ्यास और प्रतियोगिता नहीं कर सकता। बावजूद इसके, मानवीय संवेदनाओं को दरकिनार कर नियमों की आड़ में दोनों को स्टेशन पर उतार दिया गया।

घंटों की बेबसी और छूटी ट्रेन:
देव कुमार मीणा और उनके कोच को पनवेल स्टेशन पर घंटों इंतजार करना पड़ा। इस दौरान उनकी ट्रेन छूट गई, जिससे उन्हें मानसिक तनाव और शारीरिक थकान झेलनी पड़ी। एक तरफ राष्ट्रीय खिलाड़ी की पहचान, दूसरी तरफ असहाय स्थिति यह दृश्य कई यात्रियों के लिए भी झकझोर देने वाला था।

जुर्माना भरने के बाद ही मिली राहत:
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि दोनों को आगे यात्रा की अनुमति जुर्माना भरने के बाद ही मिली। जानकारी के मुताबिक, उनसे ₹1865 से ₹8880 तक का जुर्माना वसूला गया। इसके बाद ही उन्हें दूसरी ट्रेन से रवाना होने दिया गया।

रेलवे और सिस्टम पर उठे सवाल:
यह घटना सामने आने के बाद रेलवे की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। क्या देश का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों के लिए कोई संवेदनशील नियम नहीं हैं? क्या खेल उपकरणों के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश होना चाहिए?

खेल जगत में आक्रोश:
खेल जगत से जुड़े कई कोच, खिलाड़ी और संघ इस घटना को अपमानजनक और दुर्भाग्यपूर्ण बता रहे हैं। सोशल मीडिया पर मांग उठ रही है कि रेलवे को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के लिए विशेष प्रोटोकॉल बनाना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

देव कुमार मीणा के साथ हुई यह घटना सिर्फ एक खिलाड़ी की नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की संवेदनहीनता को उजागर करती है। जो देश अपने खिलाड़ियों को सम्मान नहीं दे सकता, वह उनसे ओलंपिक और अंतरराष्ट्रीय पदकों की उम्मीद कैसे कर सकता है? अब देखने वाली बात यह होगी कि रेलवे प्रशासन इस मामले से कोई सबक लेता है या नहीं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *