Baljinder Kaur: आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में माइग्रेन, हाई ब्लड प्रेशर (बीपी) और डायबिटीज़ जैसी बीमारियां आम होती जा रही हैं। दवाइयों से राहत तो मिलती है लेकिन लंबे समय तक इनके साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं। ऐसे में लोग योग की ओर उम्मीद भरी नज़र से देखते हैं। सवाल यह है कि क्या योग वाकई इन बीमारियों में असरदार है?
माइग्रेन में योग कितना कारगर?
माइग्रेन एक तरह का तेज़ सिरदर्द है जो तनाव, नींद की कमी और हार्मोनल बदलाव से बढ़ सकता है। योग माइग्रेन में इसलिए मदद करता है क्योंकि यह तनाव कम करता है और नर्वस सिस्टम को शांत करता है। कई रिसर्च में पाया गया है कि नियमित योग करने से माइग्रेन की आवृत्ति और दर्द की तीव्रता दोनों कम हो सकती हैं। योग से शरीर में स्ट्रेस हार्मोन “कॉर्टिसोल” कम होता है, जो माइग्रेन का बड़ा कारण माना जाता है।
फायदेमंद आसन
अनुलोम-विलोम प्राणायाम
बालासन
शवासन
भ्रामरी प्राणायाम
हाई ब्लड प्रेशर (बीपी) में योग की भूमिका
हाई बीपी को “साइलेंट किलर” कहा जाता है क्योंकि इसके लक्षण अक्सर देर से दिखते हैं। योग बीपी कंट्रोल करने में एक सुरक्षित और प्राकृतिक तरीका माना जाता है। अध्ययनों के अनुसार रोज़ 30–45 मिनट योग और प्राणायाम करने से सिस्टोलिक और डायस्टोलिक बीपी में कमी देखी गई है। योग दिल की धड़कन को संतुलित करता है और रक्त वाहिकाओं को रिलैक्स करता है।
उपयुक्त योगासन
ताड़ासन
वज्रासन
सुखासन में ध्यान
प्राणायाम
नोट: हाई बीपी के मरीजों को शीर्षासन जैसे उल्टे आसन डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं करने चाहिए।
डायबिटीज़ में योग कितना असरदार?
डायबिटीज़ में शरीर इंसुलिन का सही उपयोग नहीं कर पाता। योग पैंक्रियाज़ को सक्रिय करता है और ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में मदद करता है। रिसर्च बताती है कि नियमित योग से फास्टिंग और पोस्ट-प्रांडियल ब्लड शुगर लेवल में सुधार होता है। साथ ही वजन और तनाव कम होने से डायबिटीज़ मैनेज करना आसान हो जाता है।
फायदेमंद योगासन
भुजंगासन
मंडूकासन
सच क्या है और ध्यान रखने योग्य बातें
योग कोई जादू नहीं है जो एक-दो दिन में बीमारी ठीक कर दे। लेकिन अगर सही तरीके से नियमित और धैर्य के साथ किया जाए तो यह दवाइयों के साथ मिलकर बेहद असरदार साबित हो सकता है। गंभीर मरीजों को योग शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग विशेषज्ञ से सलाह जरूर लेनी चाहिए।
माइग्रेन, बीपी और डायबिटीज़ जैसी बीमारियों में योग एक भरोसेमंद सहायक उपचार है। विज्ञान भी मानता है कि योग न सिर्फ लक्षणों को कम करता है बल्कि जीवनशैली सुधारकर बीमारी की जड़ पर काम करता है। सही आसन, नियमित अभ्यास और सकारात्मक सोच—यही योग की असली ताकत है।
