Baljinder Kaur: आंखें हमारे जीवन का सबसे अनमोल उपहार हैं लेकिन कई बार कुछ बीमारियां चुपचाप हमारी आंखों की रोशनी छीन लेती हैं। ऐसी ही एक गंभीर बीमारी है ग्लूकोमा, जिसे आंखों की रोशनी का साइलेंट चोर कहा जाता है। यह बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती है और जब तक इसके लक्षण सामने आते हैं, तब तक नुकसान काफी हो चुका होता है। अगर आंखों में लगातार दर्द, धुंधलापन या देखने में परेशानी हो रही है, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाना जरूरी है क्योंकि लापरवाही स्थायी दृष्टि हानि का कारण बन सकती है।

ग्लूकोमा क्या है?
ग्लूकोमा एक ऐसी आंखों की बीमारी है जिसमें आंखों के अंदर का दबाव (आई प्रेशर) बढ़ जाता है। यह बढ़ा हुआ दबाव धीरे-धीरे आंख की नसों (ऑप्टिक नर्व) को नुकसान पहुंचाता है। ऑप्टिक नर्व आंखों से दिमाग तक दृश्य संकेत पहुंचाने का काम करती है। जब यह नस खराब हो जाती है तो देखने की क्षमता कम होने लगती है और समय पर इलाज न होने पर अंधापन भी हो सकता है।

ग्लूकोमा को ‘साइलेंट चोर’ क्यों कहते हैं?
ग्लूकोमा को साइलेंट चोर इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण अक्सर नजर नहीं आते। मरीज को धीरे-धीरे साइड से दिखना कम होने लगता है लेकिन उसे इसका एहसास नहीं होता। जब तक व्यक्ति को साफ दिखाई देने में दिक्कत महसूस होती है, तब तक बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है।

ग्लूकोमा के प्रमुख लक्षण
आंखों में लगातार या अचानक तेज दर्द
सिरदर्द और आंखों के आसपास भारीपन।
धुंधला दिखना या रोशनी के चारों ओर रंगीन घेरा दिखना।
आंखों का लाल होना।
धीरे-धीरे देखने का दायरा कम होना।
ध्यान दें: अगर आंखों में दर्द हो रहा है, तो इसे हल्के में न लें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

ग्लूकोमा के खतरे किसे ज्यादा हैं?
40 साल से अधिक उम्र के लोग।
परिवार में किसी को ग्लूकोमा की समस्या होना।
डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर के मरीज।
लंबे समय तक स्टेरॉयड दवाओं का इस्तेमाल।
आंखों में पहले चोट या सर्जरी हो चुकी हो।

ग्लूकोमा से बचाव कैसे करें?
नियमित रूप से आंखों की जांच कराएं, खासकर 40 की उम्र के बाद।
आंखों में दर्द या बदलाव को नजरअंदाज न करें।
डॉक्टर की सलाह के बिना आई ड्रॉप या दवाएं न लें।
संतुलित आहार लें और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं।

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