Baljinder Kaur: क्रिकेट के खेल में अगर किसी फॉर्मेट ने दुनिया भर के दर्शकों को सबसे ज्यादा जोड़ा है तो वह है वनडे क्रिकेट । यह फॉर्मेट टेस्ट क्रिकेट की गंभीरता और टी20 की तेज़ी के बीच एक संतुलन बनाता है। 50 ओवर के इस खेल ने क्रिकेट को स्टेडियम से निकालकर टीवी और हर घर तक पहुँचाया।
वनडे क्रिकेट की शुरुआत
वनडे क्रिकेट की शुरुआत 5 जनवरी 1971 को हुई। यह पहला वनडे मैच ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) में खेला गया। दरअसल, बारिश की वजह से टेस्ट मैच रद्द हो गया था तब दर्शकों के मनोरंजन के लिए 40-40 ओवर का यह मैच कराया गया। किसी ने नहीं सोचा था कि यह प्रयोग आगे चलकर क्रिकेट की सबसे लोकप्रिय शैली बन जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान
1970 के दशक में वनडे क्रिकेट को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने लगी। 1975 में पहला क्रिकेट वर्ल्ड कप इंग्लैंड में खेला गया जिसमें वेस्टइंडीज ने ऑस्ट्रेलिया को हराकर खिताब जीता। इसी के साथ वनडे क्रिकेट को वैश्विक मंच मिल गया। बाद के वर्षों में रंगीन कपड़े, सफेद गेंद और डे-नाइट मैचों ने इस फॉर्मेट को और भी आकर्षक बना दिया।
भारत और वनडे क्रिकेट
भारत में वनडे क्रिकेट की लोकप्रियता 1983 वर्ल्ड कप के बाद तेजी से बढ़ी। कपिल देव की कप्तानी में भारत ने वेस्टइंडीज जैसी मजबूत टीम को हराकर विश्व कप जीता। यह जीत भारतीय क्रिकेट के इतिहास में मील का पत्थर साबित हुई। इसके बाद सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली, एमएस धोनी, विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे खिलाड़ियों ने वनडे क्रिकेट को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया।
वर्ल्ड कप और बड़े रिकॉर्ड
वनडे क्रिकेट में अब तक कई यादगार वर्ल्ड कप खेले जा चुके हैं। ऑस्ट्रेलिया सबसे सफल टीम रही है भारत ने 1983 और 2011 में वर्ल्ड कप जीता। समय के साथ बड़े स्कोर, तेज़ बल्लेबाज़ी और नए रिकॉर्ड इस फॉर्मेट की पहचान बन गए।
वनडे का भविष्य
टी20 क्रिकेट के आने के बाद वनडे क्रिकेट को चुनौती जरूर मिली लेकिन आज भी यह फॉर्मेट बड़े टूर्नामेंट्स और वर्ल्ड कप की वजह से बेहद अहम है। नियमों में बदलाव, पावरप्ले और डीआरएस जैसी तकनीकों ने वनडे क्रिकेट को और रोमांचक बनाया है।
