Muskan Garg: स्कोप ग्लोबल स्किल्स यूनिवर्सिटी (SGSU) के स्कूल ऑफ़ डिज़ाइन द्वारा विद्यार्थियों के लिए ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक नगरी चंदेरी का दो दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण आयोजित किया गया। इस भ्रमण का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय पारंपरिक वस्त्र कला, हस्तशिल्प परंपराओं और स्थानीय संस्कृति से प्रत्यक्ष अनुभव के माध्यम से जोड़ना था।
विश्वविद्यालय नेतृत्व के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ भ्रमण:
यह शैक्षणिक यात्रा विश्वविद्यालय के चांसलर डॉ. सिद्धार्थ चतुर्वेदी, कुलगुरु डॉ. विजय सिंह, कुलसचिव डॉ. सितेश कुमार सिन्हा, डीन एकेडमिक्स डॉ. वी. के. गुप्ता, डीन स्टूडेंट वेलफेयर डॉ. विनोद कुमार शर्मा तथा स्कूल ऑफ़ डिज़ाइन की प्रमुख सुश्री मेघा थापा के मार्गदर्शन एवं सहयोग से सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
चंदेरी बुनाई की परंपरा को नजदीक से समझा:
भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने चंदेरी की समृद्ध वस्त्र और सांस्कृतिक विरासत का गहन अध्ययन किया। उन्हें चंदेरी साड़ी और वस्त्र निर्माण की संपूर्ण प्रक्रिया सूत्र (यार्न) की तैयारी, रंगाई की तकनीक और करघे पर बुनाई की व्यावहारिक जानकारी प्राप्त हुई। इसके साथ ही विद्यार्थियों ने स्थानीय बुनकरों और कारीगरों से प्रत्यक्ष संवाद कर पारंपरिक तकनीकों, शिल्प कौशल और उनके जीवन अनुभवों को जाना, जिससे सीखने का अनुभव और भी सजीव हो गया।
डिज़ाइन की समझ को मिला व्यावहारिक आधार:
इस शैक्षणिक भ्रमण ने विद्यार्थियों को पारंपरिक डिज़ाइनों, मोटिफ़्स, रंग संयोजन, बनावट और वस्त्र गुणवत्ता की गहरी समझ प्रदान की। कक्षा में पढ़े गए सैद्धांतिक ज्ञान को वास्तविक कार्यक्षेत्र से जोड़ने का यह एक महत्वपूर्ण अवसर रहा। इसके अलावा विद्यार्थियों ने चंदेरी की स्थानीय स्थापत्य शैली और बस्ती संरचना का भी अवलोकन किया, जिससे संदर्भ आधारित डिज़ाइन (Contextual Design) की समझ और अधिक सुदृढ़ हुई।
संस्कृति और नवाचार का संगम: नेतृत्व की प्रतिक्रिया:
इस अवसर पर एसजीएसयू के चांसलर डॉ. सिद्धार्थ चतुर्वेदी ने कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों को केवल अकादमिक ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि उन्हें भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक कौशल से भी जोड़ते हैं। इससे विद्यार्थियों में नवाचार के साथ-साथ स्वदेशी शिल्प और सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण की भावना विकसित होती है। कुलसचिव डॉ. सितेश कुमार सिन्हा और कुलगुरु डॉ. विजय सिंह ने कहा कि यह शैक्षणिक यात्रा विद्यार्थियों को पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों, स्वदेशी शिल्प के संरक्षण के महत्व के प्रति जागरूक करने में सहायक रही। यह अनुभव विद्यार्थियों को पारंपरिक तत्वों को समकालीन डिज़ाइन में शामिल करने के लिए प्रेरित करेगा।
रचनात्मकता और व्यावसायिक दृष्टिकोण को मिली नई दिशा:
यह दो दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों के लिए न केवल ज्ञानवर्धक बल्कि प्रेरणादायक भी सिद्ध हुआ। इस यात्रा ने उनकी शैक्षणिक समझ, रचनात्मक सोच और व्यावसायिक दृष्टिकोण को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भ्रमण का संपूर्ण आयोजन एवं संचालन स्कूल ऑफ़ डिज़ाइन की प्रमुख सुश्री मेघा थापा द्वारा किया गया, जो अत्यंत सुव्यवस्थित और प्रभावी रहा।
