Baljinder Kaur: भारत अब सिर्फ स्मार्टफोन का बड़ा बाजार ही नहीं बल्कि दुनिया का प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग हब भी बनता जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी मिसाल है दिग्गज टेक कंपनी Apple। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की PLI (Production Linked Incentive) स्कीम ने एप्पल की भारत में मौजूदगी को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। कभी आयात पर निर्भर रहने वाला भारत अब एप्पल के iPhone बनाने और निर्यात करने वाला बड़ा केंद्र बन चुका है। यह बदलाव न सिर्फ अर्थव्यवस्था के लिए बल्कि रोजगार और तकनीकी विकास के लिए भी ऐतिहासिक साबित हो रहा है।

PLI स्कीम क्या है और क्यों है खास?

PLI यानी प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम को सरकार ने घरेलू मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने के लिए शुरू किया था। इसके तहत कंपनियों को भारत में उत्पादन बढ़ाने पर वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाता है। इस योजना का मकसद है—
भारत में निवेश बढ़ाना।
स्थानीय उत्पादन को प्रोत्साहित करना।
आयात पर निर्भरता कम करना।
रोजगार के नए अवसर पैदा करना।
एप्पल जैसी ग्लोबल कंपनी के लिए यह स्कीम गेम-चेंजर साबित हुई।

भारत में Apple की बढ़ती मौजूदगी
पहले एप्पल के iPhone का अधिकांश उत्पादन चीन में होता था, लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदल रही है। Foxconn, Pegatron और Tata Group जैसी कंपनियां भारत में बड़े पैमाने पर iPhone का निर्माण कर रही हैं। आज भारत में बने iPhone न सिर्फ देश में बिक रहे हैं बल्कि अमेरिका और यूरोप जैसे बड़े बाजारों में भी निर्यात किए जा रहे हैं।

रोजगार और अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा

PLI स्कीम और एप्पल के निवेश से भारत में लाखों युवाओं को रोजगार मिला है। फैक्ट्रियों में प्रत्यक्ष रोजगार के साथ-साथ सप्लाई चेन, लॉजिस्टिक्स और सर्विस सेक्टर में भी अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बढ़े हैं। इसके साथ ही स्किल डेवलपमेंट और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर से स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई ताकत मिली है।

भविष्य की तस्वीर
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत एप्पल का सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब बन सकता है। इससे भारत को टेक्नोलॉजी, निर्यात और रोजगार—तीनों मोर्चों पर बड़ा फायदा मिलेगा।

पीएम मोदी की PLI स्कीम ने एप्पल के लिए भारत में संभावनाओं के नए दरवाजे खोल दिए हैं। यह सिर्फ एक कंपनी की सफलता नहीं, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की एक बड़ी जीत है।

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