Muskan Garg: नया साल आते ही जश्न, पार्टियों और शराब की खपत बढ़ जाती है। लेकिन अगर आप शादीशुदा हैं और आपकी पत्नी शराब पीने से मना कर रही है, तो इस चेतावनी को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है। कानून के तहत पत्नी की इच्छा के खिलाफ शराब पीना अब सिर्फ घरेलू विवाद नहीं, बल्कि कानूनी अपराध भी बन सकता है।
क्या कहता है कानून?
भारत में घरेलू हिंसा से जुड़े कानूनों में मानसिक और भावनात्मक उत्पीड़न को भी गंभीर अपराध माना गया है। यदि पति शराब पीकर पत्नी के साथ दुर्व्यवहार करता है, मानसिक प्रताड़ना देता है या घरेलू शांति भंग करता है, तो पत्नी घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 और IPC की संबंधित धाराओं के तहत शिकायत दर्ज करा सकती है। ऐसे मामलों में पति को 3 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है।
शराब और घरेलू हिंसा का बढ़ता खतरा:
अक्सर देखा गया है कि शराब के नशे में झगड़े, मारपीट और गाली-गलौज जैसी घटनाएं बढ़ जाती हैं। नए साल के दौरान पुलिस और महिला आयोग के पास घरेलू हिंसा की शिकायतें भी बढ़ती हैं। कानून मानता है कि अगर शराब पीना परिवार में तनाव और डर का कारण बन रहा है, तो यह मानसिक हिंसा की श्रेणी में आता है।
पत्नी के अधिकार क्या हैं?
• पत्नी पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकती है।
• कोर्ट से संरक्षण आदेश (Protection Order) ले सकती है।
• पति को शराब पीने से रोकने का निर्देश दिलाया जा सकता है।
• गुजारा भत्ता और अलग रहने का अधिकार भी मिल सकता है।
नए साल का संकल्प: समझदारी और सम्मान:
नया साल सिर्फ जश्न का नहीं, बल्कि रिश्तों को बेहतर बनाने का भी समय है। अगर पत्नी शराब से असहज है, तो उसकी भावना का सम्मान करना ही समझदारी है। कुछ पल का नशा पूरे जीवन की परेशानी बन सकता है।
नए साल की रात शराब पीने से पहले आपको यह विचार करना चाहिए कि यह उत्सव आपको जेल में डाल सकता है या नहीं। पत्नी की सहमति, कानून और जीवन दोनों के लिए आवश्यक है। याद रहे जश्न आवश्यक है, लेकिन कानून के ऊपर नहीं है। इसलिए नया साल समझदारी और ज़िम्मेदारी से मनाएं।
