Suvangi Pradhan: निवेश की दुनिया के सबसे भरोसेमंद नाम वॉरेन बफेट आज 95 वर्ष की उम्र में सक्रिय भूमिका से रिटायरमेंट ले रहे हैं। कभी घर-घर अखबार बेचकर कमाई शुरू करने वाले बफेट आज अनुमानित 97 लाख करोड़ रुपये के कारोबारी साम्राज्य के शीर्ष पर पहुंचे।
उनकी कंपनी बर्कशायर हैथवे के पास मौजूद करीब 34 लाख करोड़ रुपये का कैश रिज़र्व लंबे समय से जिज्ञासा का विषय रहा है
वॉरेन बफेट का जन्म 1930 में नेब्रास्का के ओमाहा में हुआ। महज 11 साल की उम्र में उन्होंने पहला शेयर खरीदा और किशोरावस्था तक आते-आते अखबार डिलीवरी, पिनबॉल मशीन और छोटे निवेशों से कमाई शुरू कर दी। कोलंबिया बिज़नेस स्कूल में बेंजामिन ग्राहम के मार्गदर्शन ने उनके निवेश दर्शन को आकार दिया—मजबूत कंपनियों में लंबे समय तक निवेश।
बफेट की सफलता का आधार सरल लेकिन सख्त अनुशासन रहा
कोका-कोला, अमेरिकन एक्सप्रेस, एप्पल जैसी कंपनियों में उनकी दीर्घकालिक हिस्सेदारी ने बर्कशायर हैथवे को बीमा, ऊर्जा, रेलवे और उपभोक्ता ब्रांड्स का विशाल समूह बना दिया। लेकिन सवाल यह है कि इतना बड़ा कैश क्यों? बफेट का मानना है कि नकदी अवसरों की चाबी है। बाजार में अनिश्चितता, ऊंचे मूल्यांकन और संकट के समय मजबूत कंपनियों को सस्ते में खरीदने के लिए कैश जरूरी होता है। वे अक्सर कहते रहे हैं कि जब दूसरे डरें, तब लालची बनो। कैश रखने से बर्कशायर को बिना कर्ज लिए बड़े अधिग्रहण करने की क्षमता मिलती है और जोखिम भी नियंत्रित रहता है।
95 की उम्र में रिटायरमेंट के साथ बफेट नेतृत्व की बागडोर अगली पीढ़ी को सौंप रहे हैं
लेकिन उनका निवेश दर्शन कंपनी की डीएनए में रचा-बसा है। सादगीपूर्ण जीवन, पारदर्शिता और शेयरधारकों के प्रति ईमानदारी, यही उनकी विरासत है। अखबार बेचने से लेकर वैश्विक निवेश साम्राज्य तक की यह यात्रा सिर्फ धन की कहानी नहीं, बल्कि धैर्य, अनुशासन और सही समय पर सही फैसलों की मिसाल है।

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