Suvangi Pradhan: भारत को परंपरागत रूप से सोने का देश कहा जाता है और यह पहचान आज भी पूरी तरह सच साबित होती है। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार भारतीय घरों के पास करीब 34,600 टन सोना मौजूद है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 450 लाख करोड़ है। यह राशि भारत की मौजूदा GDP 370 लाख करोड़ से भी कहीं अधिक है।
देश की अर्थव्यवस्था से ज्यादा संपत्ति भारतीय परिवारों की तिजोरियों, लॉकरों और में बंद है
भारत दुनिया में निजी तौर पर सबसे ज्यादा सोना रखने वाला देश है। यह सोना मुख्य रूप से गहनों, सिक्कों और बार के रूप में घरों में जमा है। भारतीय संस्कृति में सोने को सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि सुरक्षा, परंपरा और सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता है। शादी-ब्याह, त्योहारों और पारिवारिक अवसरों पर सोना खरीदना आज भी आम चलन है।
आर्थिक नजरिए से देखें तो यह आंकड़ा बेहद चौंकाने वाला है
एक तरफ सरकार और उद्योग जगत पूंजी की कमी की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ देश की जनता के पास इतना बड़ा संपत्ति भंडार निष्क्रिय पड़ा है। यदि इस सोने का एक छोटा हिस्सा भी औपचारिक वित्तीय प्रणाली में आ जाए, तो इससे निवेश, रोजगार और विकास को बड़ी रफ्तार मिल सकती है। सरकार ने बीते वर्षों में गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड जैसी योजनाएं शुरू कीं, ताकि घरों में पड़ा सोना अर्थव्यवस्था में वापस आए।
सोने की बढ़ती कीमतें भी इसकी लोकप्रियता को लगातार बढ़ा रही हैं
महंगाई, शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय निवेशकों के लिए सोना अब भी सबसे सुरक्षित निवेश माना जाता है। भारतीय घरों में मौजूद सोना न सिर्फ देश की आर्थिक ताकत को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि यदि इस संपत्ति का सही तरीके से उपयोग किया जाए, तो भारत की विकास यात्रा को नई दिशा और गति मिल सकती है।

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