Muskan Garg: ड्राइविंग सीखते समय अधिकतर लोगों को सिखाया जाता है कि स्टीयरिंग व्हील को घड़ी की सुइयों की तरह “10 और 2” की पोजिशन पर पकड़ें। दशकों तक इसे सबसे सुरक्षित तरीका माना गया, लेकिन अब ऑटोमोबाइल सेफ्टी एक्सपर्ट्स का कहना है कि आधुनिक गाड़ियों में यह पकड़ जोखिम भरी साबित हो सकती है।
एयरबैग और नई तकनीक ने बदला समीकरण:
आज की कारें पहले से कहीं ज्यादा एडवांस हो चुकी हैं। स्टीयरिंग व्हील के बीच लगा एयरबैग तेज टक्कर के समय कुछ मिलीसेकेंड में खुलता है। यदि ड्राइवर के हाथ “10 और 2” पोजिशन में हों, तो एयरबैग खुलते समय:
• हाथ और कलाई पर गंभीर चोट लग सकती है।
• चेहरे या छाती तक हाथ जोर से टकरा सकते हैं।
• फ्रैक्चर या स्थायी चोट का खतरा बढ़ जाता है।
यही वजह है कि विशेषज्ञ इस पारंपरिक पकड़ को अब पूरी तरह सुरक्षित नहीं मानते।
कौन-सी पकड़ है ज्यादा सुरक्षित?
सेफ्टी एक्सपर्ट्स के अनुसार, आधुनिक वाहनों के लिए “9 और 3” या “8 और 4” पोजिशन ज्यादा सुरक्षित मानी जाती है। इसके फायदे हैं:
• एयरबैग खुलने पर हाथ सीधे उसके रास्ते में नहीं आते।
• स्टीयरिंग पर बेहतर कंट्रोल बना रहता है।
• लंबे सफर में हाथों पर कम थकान होती है।
यह पकड़ इमरजेंसी ब्रेकिंग और तेज मोड़ पर भी ज्यादा स्थिरता देती है।
ड्राइविंग सेफ्टी सिर्फ पकड़ तक सीमित नहीं:
सिर्फ सही हाथों की पोजिशन ही नहीं, बल्कि कुछ और बातों का ध्यान रखना भी जरूरी है जैसे कि:
• स्टीयरिंग को बहुत कसकर न पकड़ें।
• सीट और स्टीयरिंग की दूरी सही रखें।
• ड्राइविंग के दौरान मोबाइल से दूरी बनाए रखें।
• थकान या नींद में गाड़ी न चलाएं
ये छोटे-छोटे बदलाव बड़े हादसों से बचा सकते हैं।
समय के साथ तकनीक बदलती है, और उसके साथ सेफ्टी नियमों का अपडेट होना भी जरूरी है। जो तरीका कभी सुरक्षित माना जाता था, वह आज जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए ड्राइवरों को चाहिए कि वह पुरानी आदतों को छोड़कर नई सेफ्टी गाइडलाइंस अपनाएं। सही स्टीयरिंग पकड़ न सिर्फ आपको, बल्कि सड़क पर चल रहे हर व्यक्ति को सुरक्षित रख सकती है।
